अभी नहीं खुलेगा पद्मनाभ मंदिर का छठा तहखाना

  • 22 सितंबर 2011
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Image caption पद्मनाभस्वामी मंदिर के तहखाने से अब तक डेढ़ लाख करोड़ की संपत्ति निकल चुकी है

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फ़िलहाल श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के छठे तहखाने को तभी खोला जाए जब इससे पहले खोले गए तहखानों से मिली संपत्ति के दस्तावेज़ बनाने और उनको संरक्षित करने का काम पूरा हो जाए.

न्यायमूर्ति आरवी रविंद्रन की अध्यक्षता वाली पीठ ने विशेषज्ञ समिति के इस तर्क को भी ख़ारिज कर दिया है कि मंदिर की सुरक्षा का काम केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को सौंप देना चाहिए.

अदालत ने राज्य सरकार से कहा है कि वह मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम करे. इस मंदिर के पांच तहखानों से अब तक क़रीब डेढ़ लाख करोड़ की संपत्ति निकल चुकी है.

पीठ ने ये भी कहा कि संपत्ति की देखभाल और उसकी सुरक्षा के लिए मंदिर प्रबंधन हर साल 25 लाख रुपए देगा और इस मद में ख़र्च होने वाली बाक़ी रक़म राज्य सरकार को देनी होगी.

अदालत ने कहा कि मंदिर की संपत्ति की देखभाल की ज़िम्मेदारी किसी निजी कंपनी को सौंपने के लिए कोई निविदा नहीं जारी की जाएगी बल्कि ये काम केल्ट्रॉन (केरला स्टेट इलेक्ट्रोनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) को करना होगा.

अदालत ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई तीन महीने बाद की जाएगी.

आदेश सुरक्षित

Image caption केरल उच्च न्यायालय ने मंदिर की संपत्ति और उसके प्रबंधन की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार को सौंपने का आदेश दिया था

सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर को मंदिर की सुरक्षा और तहखाना 'बी' को खोलने संबंधी अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था.

अदालत ने तिरुवनंतपुरम के इस मंदिर से संपत्ति निकालने और उसकी सुरक्षा की निगरानी के लिए 21 जुलाई को एक पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था.

राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक सीवी आनंदा बोस इस समिति के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं जबकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और केंद्रीय रिज़र्व बैंक के प्रतिनिधि इसमें शामिल हैं.

अदालत ने मंदिर से संपत्ति निकालने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए भी एक तीन सदस्यीय समिति की नियुक्ति की थी.

इस निगरानी समिति में केरल उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज जस्टिस एमएन कृष्णन, भूतपूर्व त्रावणकोर रियासत के युवराज मार्तंड वर्मा और भारत सरकार के सचिव स्तर के प्रतिनिधि शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा संबंधी आदेश मार्तंड वर्मा और उनके परिवार के सदस्यों की ओर से केरल उच्च न्यायालय के 31 जनवरी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के बाद दिए थे.

केरल उच्च न्यायालय ने मंदिर की संपत्ति और उसके प्रबंधन की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार को सौंपने का आदेश दिया था.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मंदिर की बेशुमार संपत्ति को मीडिया में मिल रहे व्यापक कवरेज को देखते हुए इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी.

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