तेलंगाना के समर्थन में पेट्रोल पंप भी बंद

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Image caption तेलंगाना में लगातार कई दिनों से हड़ताल चल रही है

सरकारी कार्यालय और शिक्षा संस्थान बंद, बिजली नहीं, बस सेवा नहीं, और अब ऑटो रिक्शा और रेलें भी नहीं, पेट्रोल पम्प बंद और अब शराब की दुकानें भी बंद.

यह है तेलंगाना प्रांत की वो तस्वीर जो 11 दिन से चली आ रही अनिश्चित काल की हड़ताल से उभर कर सामने आई है.

अलग राज्य के लिए दशकों से लड़ने वाले तेलंगाना क्षेत्र में खुद वहां के आम लोगों ने ही वहां के सामान्य जीवन को स्थगित करके रख दिया है क्योंकि उनके अनुसार केंद्र सरकार और कांग्रेस पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व की लापरवाही और खामोशी को तोड़ने का इसके सिवा अब कोई रास्ता नहीं रह गया है.

जहाँ आठ लाख से भी ज्यादा सरकारी कर्मचारियों, अध्यापकों और दूसरे कामगारों की हड़ताल से आम जीवन ठप हो कर रह गया है और प्रशासन बिलकुल निलंबित है.

गत चार दिनों से सरकारी परिवहन निगम की दस हज़ार बसें सड़कों से गायब है वहीं आज शुकवार को अर्धरात्रि से हैदराबाद सहित पूरे तेलंगाना क्षेत्र में पांच लाख ऑटो रिक्शा भी हड़ताल पर जा रहे हैं.

शनिवार की सुबह से 48 घंटों के लिए रेल सेवाएँ भी बंद हो रही हैं. ऑटो रिक्शा ड्राईवर्स की संयुक्त संघर्ष समिति ने तेलंगाना के समर्थन में 48 घंटों के बंद का आह्वान किया है जिसको कड़ी के साथ लागू किया जाएगा.

इसी तरह तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने कल सुबह से 48 घंटों के रेल रोको कार्यक्रम का आह्वान किया है और तेलंगाना के आम लोगों से कहा है की वोह लाखों की संख्या में रेल की पटरियों पर जा बैठें और रेल न चलने दें.

वैसे भी रेल प्रशासन आम लोगों से टकराने के मूड में नहीं हैं और उस ने खुद ही तेलंगाना में चलने या उस से गुज़रकर जाने वाली सारी ही एक्सप्रेस और यात्री ट्रेनें रद्द करदेने करने की घोषणा की है.

इससे दक्षिणी और उत्तरी भारत के बीच एक अहम रेल संपर्क टूट जाएगा क्योंकि तेलंगाना से होकर जाने वाली लंबी दूरी की कई रेलें या तो रद्द होगी हैं या फिर उनका रास्ता बदल दिया गया है.

पेट्रोल और शराब भी बंद

Image caption बसें और ऑटोरिक्शा का सड़क पर चलना बंद है

इस बीच तेलंगाना वड्डी छात्रों ने कल एक दिन पेट्रोल पम्प और शराब की दुकानों को भी बंद रखने का आह्वान किया है. उनका कहना है कि उसका उद्देश्य इन दोनों से राज्य सरकार को होने वाली आय को नुकसान पहुंचना है.

वैसे भी कार्यालय बंद रहने से और टैक्स वसूल न होने, कोयले का उत्पादन बंद हो जाने, बिजली का उत्पादन कम हो जाने और बसें न चलने और कुल मिला कर अनिश्चित काल की हड़ताल से राज्य सरकार को तीन हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.

जहाँ घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पहले ही सरकार दो घंटों से लेकर आठ घंटों तक बिजली की कटौती की घोषणा कर चुकी है.

वहीं आज से किसानों को रोज़ाना मुफ्त दी जाने वाली बिजली को सात घंटों से घटा कर छह घंटे कर दिया गया है.

अधिकारियों का कहना है कि जैसे जैसे बिजली का उत्पादन और घटेगा, उन्हें बिजली कटौती की अवधि घटानी पड़ेगी.

वैसे बिजली विभाग के अधिकारी पहले ही चेतावनी दे चुके हैं की अगर यह स्थिति कुछ और दिन चली तो पूरा राज्य ही अँधेरे में डूबने वाला है.

इस के अलावा डॉक्टरों और वकीलों की हड़ताल से भी अदालतों और अस्पतालों का काम भी ठप पड़ गया है. डॉक्टर केवल आपात कालीन जैसे ही देख रहे हैं और आम रोगियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

सरकार की खामोशी!

तेलांगना में हड़ताल के संपूर्ण और सफल होने के बावजूद राज्य और केंद्र सरकार दोनों का व्यवहार ऐसा है जैसे सब कुछ सामान्य रूप से चल रहा है.

दिल्ली में कांग्रेस के दो प्रवक्ताओं रेणुका चौधरी और अभिषेक मनु सिंघवी ने तो यह कह कर तेलंगाना के लोगों को और भी भड़का दिया है कि तेलंगाना में आम जीवन और सरकार पर हड़ताल का कोई असर नहीं पद रहा है.

केंद्र सरकार की खामोशी पर आम लोगों के साथ खुद कांग्रेस के तेलंगाना नेता भी बहुत नाराज़ हैं और उन्होंने भी हड़ताल का समर्थन शुरू कर दिया है.

कल रात कांग्रेस के तेलंगाना सांसदों ने मुख्य मंत्री किरण कुमार रेड्डी से भेंट की और दोनों के बीच तीखी बहस हो गई.

एक सांसद पूनम प्रभाकर ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल पर आरोप लगाया की वो केंद्र को गलत रिपोर्टें भेज रहे हैं और सोनिया गाँधी को अँधेरे में रखा जा रहा है.

इस बार मुख्यमंत्री उस सांसद पर बरस पड़े और तमाम सांसद मुख्यमंत्री के व्यवहार के खिलाफ उठ खड़े हुए. मुख्यमंत्री ने यह कह कर सब को हैरान कर दिया कि उन्होंने अब तक इस हड़ताल के बारे में कोई रिपोर्ट केंद्र को भेजी ही नहीं.

केंद्र की खुशी के लेकर तेलंगाना वादी विधायकों और दूसरे नेताओं के विरुद्ध भड़कने लगे हैं.

उनका विचार यही है कि केंद्र को तेलंगाना राज्य की स्थापना पर उसी समय मजबूर किया जा सकता है जब तेलंगाना के तमाम विधायक और सांसद इस्तीफा दे दें.

अब तक केवल तेलंगाना राष्ट्र समिति के 11 और तेलुगु देसम के चार बागी विधायकों ने ही इस्तीफा दिया है.

तेलंगाना के मंत्रियों और कांग्रेस और तेलुगु देसम के सभी विधायकों पर तुरंत त्यागपत्र देने के लिए लोगों का दबाव बढ़ रहा है और वो उन्हें हमलों का निशाना बनाने लगे हैं.

आज तेलंगाना के लगभग सभी जिलों में तेलुगु देसम के विधायकों पर हमले किए गए उनकी गाड़ियों के शीशे तोड़े गए.

इन विधायकों पर वारंगल, करीमनगर, निज़ामाबाद, आदिलाबाद, महबूबनगर और दूसरे स्थानों पर उस समय हमला किया गया जबकि वो तेलंगाना के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठने जा रहे थे.

टीआरएस और दूसरे तेलंगाना समर्थकों की मांग है कि पहले यह विधायक त्यागपत्र दें और फिर आन्दोलन में शामिल हों.

आज ही तेलंगाना में कांग्रेस के दो मंत्रियों डीके अरुणा और सूर्या के निवासस्थान का भी घेराव किया गया.

तेलुगु देसम के तेलंगाना विधायकों ने त्यागपत्र देने के लिए 28 सितम्बर की तारीख तय की है जबकि कांग्रेस के तेलंगाना विधायकों और सांसदों ने कहा है कि वो पार्टी आला कमान को 25 सितम्बर तक समय देंगे और उसके बाद त्यागपत्र दे देंगे.

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