प्रधानमंत्री ईरान की यात्रा पर जाएँगे

मनमोहन सिंह और अहमदीनेजाद की मुलाक़ात इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption मनमोहन सिंह और अहमदीनेजाद के बीच पाइप लाइन और परमाणु कार्यक्रम के विवादास्पद मसलों पर चर्चा नहीं हुई

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईरान की यात्रा पर जाएँगे.

उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मोहमूद अहमदीनेजाद का आमंत्रण सिद्धांत रुप में स्वीकार कर लिया है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के दौरान दोनों नेताओं की अलग से हुई मुलाक़ात में अहमदीनेजाद ने यह आमंत्रण दिया.

यात्रा की तारीख़ें कूटनीतिक वार्ताओं के बाद तय की जाएँगीं.

इससे पहले वर्ष 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने ईरान की यात्रा की थी.

बातचीत

दोनों नेताओं की लंबे समय बाद हुई मुलाक़ात के बाद भारत के विदेश सचिव रंजन मथाई ने पत्रकारों को बताया कि चर्चा में आपसी रिश्तों की समीक्षा की गई.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति, पश्चिमी एशिया और उत्तरी अफ़्रीका की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी चर्चा की.

इस बातचीत में यह भी सहमति बनी कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन की समीक्षा की जाए, जिसकी अगली अध्यक्षता ईरान को करनी है.

यह पूछे जाने पर कि भारत और ईरान के नेताओं की इस मुलाक़ात से भारत और अमरीका के रिश्तों पर क्या विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा, विदेश सचिव ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत सिर्फ़ द्विपक्षीय मसलों पर ही हुई है.

उनका कहना है कि हालांकि दोनों के बीच कई आर्थिक मसलों पर बातचीत हुई लेकिन प्रस्तावित ईरान-भारत गैस पाइप लाइन पर बात नहीं हुई.

उनका कहना था कि परमाणु मसले पर भी कोई चर्चा नहीं हुई.

राजपक्षे से भी मुलाक़ात

इससे पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे से भी मुलाक़ात हुई है.

विदेश सचिव के अनुसार दोनों नेताओं ने आपसी मसलों पर चर्चा हुई है.

उनका कहना था कि राष्ट्रपति राजपक्षे ने तमिलों को अधिकार सौंपने के प्रस्तावों के बारे में और तमिल नेशनल एलाएंस से हो रही बातचीत से अवगत करवाया और बताया कि इस मामले पर संसद की स्थाई समिति अलग से चर्चा कर रही है.

दोनों नेताओं ने विस्थापित लोगों के पुनर्वास और मछुवारों की समस्याओं पर भी बातचीत की है.

विदेश सचिव का कहना था, "प्रधानमंत्री का मत था कि तमिल लोगों की समस्याओं का सफलतापूर्वक अंत श्रीलंका में किसी भी तरह के बाहरी हस्तक्षेप की ज़रुरत को ख़त्म कर सकता है."

इसके अलावा मनमोहन सिंह ने जापान के नए प्रधानमंत्री योशिहिको नोडा से भी मुलाक़ात की है और उन्हें प्रधानमंत्री बनने की बधाई दी है.

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