तेलंगाना: रेल रोको आंदोलन ख़त्म

आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के समर्थन में शनिवार से शुरु हुआ 48 घंटों का रेल-रोको आंदोलन रविवार को शाम छह बजे समाप्त हो गया.

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के प्रोफ़ेसर कोडंडाराम ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि रेल रोको आंदोलन के ज़रिए वे जो संदेश देना चाहते थे उसमें वे सफल हो गए हैं लिहाज़ा अब इसे आगे जारी रखने की ज़रूरत नहीं है.

प्रोफ़ेसर कोडंडाराम ने कहा कि त्योहारों का समय और बहुत सारे लोगों को रेल के ज़रिए यात्री करनी है इसलिए आम लोगों की तकलीफ़ो को भी ध्यान में रखते हुए ये फ़ैसला किया गया है.

रेल रोको आंदोलन की घोषणा के कारण हैदराबाद समेत सभी दस ज़िलों में ट्रेने नहीं चल पर रहीं थीं और जिन- जिन जगहों से रेलवे लाइन गुज़रती है, उन जगहों पर लोग पटरियों पर बैठ गए थे.

सैकड़ों रेलें रद्द करनी पड़ी थीं.रेल यातायात अवरूद्ध होने की वजह से लाखों यात्री जगह-जगह पर फंसे हुए थे.

लेकिन कई लोग रेल रोका आंदोलन को और आगे बढ़ाने की अपील कर रहे थे और तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने भी घोषणा की थी कि वो इस रेल हड़ताल को दो दिन के लिए और आगे बढ़ा सकते हैं.

हांलाकि पूर्व निर्धारित घोषणा के मुताबिक रेल हड़ताल 48 घंटों के बाद रविवार को ख़त्म होनी थी.

आख़िरकार रविवार को शाम छह बजे से रेल रोको आंदोलन ख़त्म कर लिया गया.

पटरियों पर धरना

शनिवार से शुरु हुए रेल रोको आंदोलन को सफल बनाने के लिए तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति और उससे जुड़े राजनीतिक दलों के नेता शनिवार की सुबह छह बजे से ही कई स्थानों पर रेल की पटरियों पर बैठ गए थे

इनमें तेलंगाना राष्ट्र समिति, भारतीय जनता पार्टी, सीपीआई एमएल न्यू डेमोक्रेसी के नेता भी शामिल थे.

यूँ तो पूरे तेलंगाना क्षेत्र में जहाँ से भी रेल की पटरियाँ गुज़र रही थीं वहां पर हज़ारों लोग बैठ गए थे लेकिन उनका सबसे बड़ा जमावड़ा सिकंदराबाद, मौला अली, काजीपेट, निज़ामाबाद, आदिलाबाद, पेद्दापल्ली, खम्मम और नलगोंडा रेलवे स्टेशनों पर था क्योंकि आंध्र क्षेत्र और दूसरे राज्यों की ट्रेनें यहीं से होकर गुज़रती हैं.

कई स्थानों पर तेलंगाना समर्थकों ने रेल पटरियों और स्टेशनों को खेल के मैदान में बदल दिया था.

उद्योग जगत की हड़ताल

इस बीच, उद्योग जगत ने भी घोषणा की है कि 26 और 27 सितंबर को वो भी हड़ताल करेंगे.

मंगलवार से राज्य के सारे सरकारी ड्राइवरों ने भी हड़ताल पर जाने की धमकी दी है. सोमवार से राज्य के सारे शराब निर्माता भी हड़ताल पर जा रहे हैं.

परिवहन निगम की बसें पिछले सात दिनों से नहीं चल रही हैं और इलाक़े के लाखों ऑटो रिक्शा चालक भी शनिवार से दो दिनों की हड़ताल पर हैं.

रविवार को राज्य के परिवहन निगम की यूनियन और सरकार से बातचीत फ़ेल हो गई और इसके बाद यूनियन ने फ़ैसला किया कि बसों की हड़ताल जारी रहेगी.

इसकी वजह से पूरे तेलंगाना क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ गई है.

आंध्र प्रदेश में पिछले 13 दिनों से अनिश्चित कालीन हड़ताल जारी है.

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