दिल्ली मेट्रो को संयुक्त राष्ट्र से मिला 'कार्बन क्रेडिट'

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Image caption संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि जैसे-जैसे यात्रियों की संख्या बढ़ती जाएगी ये सहायता और बढ़ जाएगी.

दिल्ली मेट्रो दुनिया का पहला ऐसा रेलवे नेटवर्क बना है जिसे संयुक्त राष्ट्र ने ग्रीन हाउस गैसों में कमी लाने के लिए कॉर्बन क्रेडिट दिया है.

संयुक्त राष्ट्र ने विज्ञप्ति में कहा है कि इस परिवहन प्रणाली ने शहर का प्रदूषण स्तर एक साल में 6,30,000 टन कम किया है.

अगर मेट्रो नहीं होती तो राज्य के 18 लाख लोग रोज़ कार, बस या मोटर साइकिल का इस्तेमाल करते जिससे प्रदूषण में बढ़ोत्तरी होती.

अब दिल्ली को सात सालों के लिए 95 लाख डॉलर कार्बन क्रेडिट के तौर पर मिलेंगे.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि जैसे-जैसे यात्रियों की संख्या बढ़ती जाएगी ये राशि और बढ़ जाएगी.

संयुक्त राष्ट्र के 'स्वच्छ विकास तंत्र' यानी क्लीन डेवलपमेंट मैकेनिज़्म की योजना के तहत कार्बन क्रेडिट दिया जाता है.

वित्तीय सहायता

इस योजना के अनुसार ग्रीन हाउस गैसों में कटौती करने के लिए विकासशील देशों की व्यावसायिक कंपनियों को वित्तीय सहायता दी जाती है.

संयुक्त राष्ट्र ने वक्तव्य में कहा है, "क्योटो प्रोटोकॉल के अंतर्गत संयुक्त राष्ट्र की जो इकाई स्वच्छ विकास तंत्र का संचालन करती है उसने ये प्रमाणित किया है कि दिल्ली की मेट्रो ने ग्रीन हाउस गैसों में कटौती की है."

इस वक्तव्य में ये भी कहा गया है कि दुनिया में किसी भी मेट्रो को कार्बन क्रेडिट नहीं मिला है क्योंकि इसके लिए एक निर्णायक दस्तावेज़ प्रमाण चाहिए जो ये बता सके कि कटौती हुई है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि, "जो भी यात्री कार या बस की बजाय मेट्रो का इस्तेमाल करते हैं वे हर 10 किलोमीटर की दूरी के लिए तक़रीबन 100 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड में कमी लाते है और इससे जलवायु परिवर्तन में कमी लाने में मदद मिलती है."

दिल्ली में मेट्रो 2002 में शुरू हुई थी. कई इलाक़ों में मेट्रो भूमिगत भी चलती है. दिल्ली में सबसे पहले शाहदरा में रिठाला में मेट्रो की शुरुआत हुई थी और अब ये दिल्ली के आस-पास के इलाक़ो में भी फैल गई है.

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