सुप्रीम कोर्ट ने मोदी की याचिका ख़ारिज की

ललित मोदी इमेज कॉपीरइट bbc
Image caption इसी मामले पर ललित मोदी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की थी लेकिन उसे ख़ारिज कर दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएल में वित्तीय अनियमितताओं की जाँच के लिए बीसीसीआई की अनुशासन समिति के बजाए एक स्वतंत्र जाँच समिति की माँग करने वाली ललित मोदी की याचिका ख़ारिज कर दी है.

दो जजों जेएम पंचाल और एचएल गोखले की खंडपीठ का कहना था कि बीसीसीआई ने इस मामले की जाँच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन वैधानिक ढंग से किया था और इसका गठन दोबारा, मात्र इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि क्योंकि मोदी को इसके भेदभावपूर्ण होने की आशंका है.

खंडपीठ का कहना है था कि,"हमें नहीं लगता कि समिति के सदस्य इस मामले की सुनवाई निष्पक्ष ढंग से नहीं करेंगे."

जजों का कहना था कि केवल भेदभावपूर्ण होने की आशंका समिति के दोबारा गठन का आधार नहीं हो सकता है.

भेदभावपूर्ण

आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी पर लगे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जाँच के लिए बीसीसीआई ने जिस तीन सदस्यीय अनुशासन समिति का गठन किया था और उसके सदस्य अरुण जेटली, चिरायु अमीन और ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं.

मोदी ने इस समिति से अरुण जेटली और अमीन को हटाने की माँग करते हुए आरोप लगाया था कि इन दोनों का रवैया भेदभावपूर्ण हो सकता है क्योंकि ये बीसीसीआई की स्पेशल जनरल बॉडी के भी सदस्य हैं.

मोदी का कहना था कि उनके ख़िलाफ़ इसी बॉडी ने फ़ैसला लिया था.

इससे पहले ललित मोदी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका डालकर अनुशासन समिति से चिरायु अमीन और अरुण जेटली को हटाने और अपने निलंबन के फ़ैसले के खिलाफ़ याचिका दायर की थी.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस याचिका को पिछले साल के जुलाई महीने में ख़ारिज कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ललित मोदी की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने अपने ख़िलाफ़ बीसीसीआई की जांच समिति की जगह एक स्वतंत्र जांच समिति की मांग की थी.

अदालत ने कहा कि बीसीसीआई की जांच समिति का रवैया ‘भेदभावपूर्ण होने की आशंका’ मात्र किसी स्वंतत्र जांच की मांग का आधार नहीं हो सकती.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पक्षपात का ‘वास्तविक ख़तरा’ ही इसका आधार हो सकता है.

संबंधित समाचार