क़ब्रों के मुद्दे पर पीडीपी ने किया वॉकआउट

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जम्मू कश्मीर विधान सभा में सामूहिक क़ब्रों के मुद्दे को लेकर मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ. मुख्य विपक्षी दल पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रश्न काल के दौरान वॉकआउट कर दिया.

हंगामा उस समय शुरु हुआ जब स्पीकर ने सामूहिक क़ब्रों के मसले पर पीडीपी के स्थगन प्रस्ताव को नामंज़ूर कर दिया. स्पीकर ने ये कहते हुए प्रस्ताव मंज़ूर नहीं किया कि ये मुद्दा पहले से ही एजेंडा में शामिल है.

लेकिन पीडीपी का कहना था कि ये मसला काफ़ी महत्वपूर्ण है. बाद में पार्टी के सभी 22 सदस्यों ने वॉकआउट कर दिया और कार्यवाही का बहिष्कार किया.

बाद में कामकाज दोबारा शुरु हुआ और बहस में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद थे.

'पहचान की जाएगी'

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने आश्वत किया कि क़ब्रों में दफ़न लोगों को पहचाने जाने का तरीका निकालने का काम जारी है.

उनका कहना था, “जिन लोगों को आशंका है कि उनके दोस्त-रिश्तेदार इन क़ब्रों में दफ़न हो सकते हैं उन्हें राज्य की मानवाधिकार संस्था के पास पंजीकरण करवाना चाहिए और अपने डीएनए के नमूने सौंपने चाहिए.”

उमर अब्दुल्ला ने ये भी कहा कि ये ज़रूरी नहीं है कि इन क़ब्रों में दफ़न सभी लोगों को सुरक्षाबलों ने ही मारा है बल्कि चरमपंथियों ने भी लोगों को क़त्ल किया है.

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 1990 के बाद से जम्मू कश्मीर में केवल 17 हज़ार नागरिकों की मौत हुई है. उनका कहना था कि अलगाववादी ये संख्या बढ़ चढ़ कर बता रहे हैं.

माना जा रहा है कि जम्मू कश्मीर विधानसभा का बुधवार का सत्र भी हंगामेदार होगा क्योंकि अफ़ज़ल गुरु को माफ़ी देने संबंधी प्रस्ताव पेश किया जाएगा.

पीडीपी पहले ही प्रस्ताव को अपना समर्थन दे चुकी है लेकिन सत्ताधारी नेशनल कॉंफ़्रेंस और कांग्रेस पार्टी ने अपना रुख़ स्पष्ट नहीं किया है.

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