जात्रा में भी ममता की धूम

ममता बनर्जी इमेज कॉपीरइट BBC World Service

तृणमूल कांग्रेस की नेता से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक की ममता बनर्जी की यात्रा पश्चिम बंगाल में इस साल जात्रा यानी थिएटर कंपनियों की पसंदीदा थीम बन गई है.

बंगाल में जात्रा की परंपरा समाज में गहरी रची-बसी है. दुर्गापूजा और उसके बाद कोलकाता की तमाम थिएटर कंपनियां दूर-दराज के गावों में घूम-घूम कर नाटकों का मंचन करती हैं. यह विधा उन इलाकों में काफ़ी लोकप्रिय है.

अमूमन साल के दौरान घटी प्रमुख घटनाओं को ही इनका थीम बनाया जाता है. लेकिन इस साल कम से कम आधा दर्जन जात्रा कंपनियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की लोकप्रियता को भुनाने के लिए उनके राजनीतिक सफर और कामयाबी पर आधारित नाटक लिखे हैं.

यह पहला मौका है जब किसी जीवित पात्र के आधार पर इतनी पटकथाएं लिखी गई हैं. ममता के राजनीतिक सफर पर तैयार नाटकों के शीर्षक से ही सब कुछ साफ़ हो जाता है.

'सपनों की नेता ममतामयी'

महानगर की कंपनी गीतांजलि ओपेरा ने अपने नाटक का शीर्षक दिया है ‘स्वपनेर नेत्री ममतामयी यानी सपनों की नेता ममतामयी’.

वहीं दिग्विजय ओपेरा ने ‘महासंग्रामे जयी ममता यानी महायुद्ध में जीती ममता’ शीर्षक से नाटक के मंचन की तैयारी की है.

थिएटर कंपनी आनंदवीणा ने अपने नाटक को ‘बांग्लार क्षमताय एबार ममता यानी बंगाल की सत्ता पर अबकी ममता’ नाम दिया है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हमशक्ल दिखने वाली अभिनेत्री रूमा चक्रवर्ती इसमें ममता की भूमिका निभा रही हैं. रूमा कहती है, “ममता ने बरसों संघर्ष करने के बाद यह मुकाम पाया है. हम इतना सब कुछ तीन घंटे के नाटक में दिखाने का प्रयास कर रहे हैं.”

रूमा इससे पहले बांग्ला में ममता पर बनी एक फिल्म में भी यह भूमिका निभा चुकी हैं. इस नाटक के निर्देशक कनक भट्टाटाचार्य कहते हैं, “ममता का नाम ही भीड़ खींचने के लिए काफी है. इसलिए हमने उनके सफर और उनको मिली कामयाबी पर नाटक के मंचन का फैसला किया है. उम्मीद है ग्रामीण इलाके के दर्शक इस नाटक को काफी पसंद करेंगे.”

वे बताते हैं कि विभिन्न ज़िलों में इस नाटक के 45 शो बुक हो चुके हैं. बंगाल की थिएटर कंपनियों की ओर से होने वाली इस जात्रा में बांग्ला फिल्मद्योग के शीर्ष सितारों के अलावा बालीवुड की कई हस्तियां भी शिरकत करती रही हैं.

जात्रा का चलन

Image caption बंगाल में जात्रा का काफ़ी चलन है.

इस साल भी मोनिका बेदी और रवीना टंडन कुछ नाटकों में काम करेंगी. इससे पहले बीते साल असरानी और कादर खान जैसे कलाकारों ने कई नाटकों में काम किया था.

‘महाकरने मुख्यमंत्री ममता (राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री ममता)’ नाटक के निर्माता गौतम चक्रवर्ती बताते हैं. “नाटक में नंदीग्राम और सिंगुर के आंदोलन और राज्य सचिवालय राइटर्स बिल्डिंग तक ममता के सफर को दिखाया जाएगा.”

कनक भट्टाटाचार्य कहते हैं कि यह नाटक उस जुझारू नेता (ममता) के प्रति सम्मान जताने का एक तरीका है. वे आम लोगों में बेहद लोकप्रिय हैं.

अक्तूबर से दिसबंर के बीच जात्रा कंपनियां ग्रामीण इलाकों में घूम-घूम कर नाटकों का मंचन करती हैं. इनमें बीते साल भर के दौरान देश-दुनिया में घटी विभिन्न घटनाओं को दिखाया जाता है.

इससे पहले वर्ष 2004 में धनंजय चटर्जी को हुई फांसी पर भी कोई चार-पांच कंपनियों ने नाटक लिखे थे. कोलकाता में जात्रा कंपनियों के मोहल्ले चितपुर में होने वाली तैयरियों से साफ़ है कि इस साल बंगाल के ग्रामीण इलाकों में मनोरंजन के क्षेत्र में भी ममता का ही जलवा रहेगा.

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