नोट के बदले वोट: कुलकर्णी भी जेल गए

  • 27 सितंबर 2011
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Image caption सुधीन्द्र कुलकर्णी पहली बार अदालत के सामने पेश हुए

दिल्ली की एक अदालत ने 'नोट के बदले वोट' के मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी की अंतरिम ज़मानत की याचिका ख़ारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

सुधीन्द्र कुलकर्णी को गिरफ़्तार करके तिहाड़ जेल भेज दिया गया है.

नियमित ज़मानत उनकी याचिका पर सुनवाई पहली अक्तूबर को होगी, ज़ाहिर है तब तक वे इस मामले के अन्य अभियुक्तों के साथ तिहाड़ जेल में रहेंगे.

इस मामले में समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह और भाजपा के दो पूर्व सांसदों, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर सिंह भगौरा को अदालत गत छह सितंबर को न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है.

बाद में स्वास्थ्य के आधार पर अमर सिंह को ज़मानत दी गई है.

वैसे 'नोट के बदले वोट' के मामले में गिरफ़्तार किए जाने वाले वे छठवें व्यक्ति हैं.

दिल्ली पुलिस ने उन्हें इस मामले का मुख्य षडयंत्रकारी बताया है.

'भ्रष्टाचार उजागर करने के लिए'

इससे पहले अदालत ने सुधीन्द्र कुलकर्णी को दो बार अदालत में पेश होने के लिए सम्मन भेजा था कि लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए थे.

अदालत ने चेतावनी दी थी कि मंगलवार को वे अदालत में पेश नहीं हुए तो उनकी गिरफ़्तारी का वारंट जारी हो सकता है.

वे तीस हज़ारी कोर्ट में पेश हुए और बताया कि वे अपनी बेटी के दाख़िले के संबंध में विदेश में थे इसलिए इससे पहले वे अदालत में पेश नहीं हो सके.

उनका कहना था कि जब दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोप पत्र दाख़िल किया, उससे पहले ही वे विदेश जा चुके थे.

उनकी अंतरिम ज़मानत की याचिका पर बहस करते हुए सुधीन्द्र कुलकर्णी के वकील ने कहा कि वे सिर्फ़ व्हिसिल ब्लोवर थे और उनका उद्देश्य भ्रष्टाचार को उजागर करना था.

उनके वकील का कहना था, "एक ऐसे व्यक्ति को अंतरिम ज़मानत न देने की कोई वजह ही नहीं है जिसकी नियमित ज़मानत की याचिका अदालत में लंबित है और फिर उन्हें जाँच के दौरान गिरफ़्तार भी नहीं किया गया था."

इस पर न्यायाधीश संगीता धींगरा ने उनसे पूछा कि अगर उनका उद्देश्य सिर्फ़ भ्रष्टाचार को उजागर करना था तो वे इसकी शिकायत लेकर सक्षम अधिकारी के पास क्यों नहीं गए, इस पर उनके वकील ने कहा कि उन्हें इस मामले को सीधे लोकसभा ले जाना उचित लगा.

अदालत ने दिल्ली पुलिस की इस बात को लेकर भी खिंचाई की कि जाँच के दौरान उसने दो-तीन अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया और बाक़ी लोगों को छोड़ दिया.

दिल्ली पुलिस ने अपने आरोप पत्र में कहा है कि वर्ष 2008 में यूपीए सरकार के विश्वासमत को प्रभावित करने के लिए कांग्रेस से संपर्क न हो पाने के बाद समाजवादी पार्टी का रुख़ किया.

पुलिस का आरोप

पुलिस का आरोप है कि सांसदों को 'नोट के बदले वोट' देने का षडयंत्र सुधीन्द्र कुलकर्णी ने ही रचा था और सहअभियुक्त सुहैल हिंदुस्तानी को निर्देश दिए थे कि वह समाजवादी पार्टी के नेताओं से मिले.

समाजवादी पार्टी के नेता कथित तौर पर लोकसभा में वोट से पहले कथित तौर पर भाजपा के सांसदों से मिले थे.

यह मामला वर्ष 2008 का है जब भाजपा के तीन सांसदों अशोक अर्गल, महावीर भगौरा और फग्गन सिंह कुलस्ते ने मनमोहन सिंह सरकार के विश्वास मत हासिल किए जाने के दौरान लोकसभा में नोटों की गड्डियां लहरा कर सनसनी फैला दी थी.

तीनों सांसदों ने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी के तत्कालीन महासचिव अमर सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने विश्वास मत में हिस्सा नहीं लेने के बदले रुपए देने की पेशकश की थी. जबकि इन दोनों ने इन आरोपों से इनकार किया था.

इसके बाद तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने केस दर्ज किया था.

भाजपा ने पहले की ही तरह मंगलवार को फिर दोहराया है कि जिन लोगों ने भ्रष्टाचार को उजागर करना चाहा वे तो जेल भेज दिए गए लेकिन जिन्हें इससे फ़ायदा हुआ उनके ख़िलाफ़ जाँच भी नहीं हो रही है.

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