प्रणब फिर मिले सोनिया से

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Image caption प्रणब मुखर्जी के मंत्रालय ने ही वो दस्तावेज़ भेजा था जिसने चिदंबरम को कटघरे में खड़ा कर दिया है

2जी स्पेक्ट्रम विवाद को लेकर सरकार की बढ़ती परेशानी के बीच वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने यूपीए चेयरपर्सन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात की है.

प्रणब मुखर्जी की सोनिया गांधी से मुलाक़ात ऐसे समय पर हुई है जब उन्होंने 2जी स्पेक्ट्रम विवाद को लेकर अपने मंत्रालय के दस्तावेज़ के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र भेजकर सफ़ाई दी है.

ये दस्तावेज़ सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया है. इस दस्तावेज़ के अनुसार वित्तमंत्रालय ने कहा है कि वित्तमंत्री रहते हुए पी चिदंबरम ने यदि 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिए पर्याप्त प्रयास किए होते तो वर्ष 2001 के दाम पर लाइसेंस का वितरण रोका जा सकता था.

इससे पहले रक्षा मंत्री एके एंटनी और गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भी सोनिया गांधी से मुलाक़ात की थी.

इस ताज़े विवाद के बाद प्रमुख विपक्षी दल भाजपा पी चिदंबरम के इस्तीफ़े की मांग कर रहा है.

मुलाक़ातों का दौर

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Image caption सोनिया गांधी के सामने सरकार को इस विवाद से निकालने की चुनौती है

प्रणब मुखर्जी ने तीन दिनों में दूसरी बार सोनिया गांधी से मुलाक़ात की है.

इससे पहले न्यूयॉर्क से लौटने के बाद उनसे मिले थे. मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार प्रणब मुखर्जी ने सोनिया गांधी से हुई चर्चा के बाद ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से कहा है कि रक्षा मंत्री एके एंटनी ने भी सोनिया गांधी और उनके राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से मुलाक़ात की है.

इस हफ़्ते की शुरुआत में गृहमंत्री पी चिदंबरम ने भी सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की थी.

सूचना के अधिकार के तहत हासिल हुए दस्तावेज़ को जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया है और मांग की है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में पी चिदंबरम को गवाही के लिए बुलाया जाना चाहिए.

प्रणब की सफ़ाई

Image caption मनमोहन सिंह ने पी चिदंबरम को पहले ही क्लीन चिट दे दी है

इस दस्तावेज़ में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर हुई विभिन्न बैठकों और विभिन्न मंत्रालयों के बीच हुए पत्राचार का ब्यौरा है.

मीडिया में प्रकाशित ख़बरों के अनुसार प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सफ़ाई दी है कि जो दस्तावेज़ वित्तमंत्रालय की ओर से भेजा गया था वह दरअसल अंतर-मंत्रालयीन पृष्ठभूमि दस्तावेज़ था जिसे कई विभागों की मदद से तैयार किया गया था.

उन्होंने अपनी सफ़ाई में कहा है कि ये दस्तावेज़ इसलिए तैयार किया गया था ताकि यदि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में यदि किसी विभाग के अधिकारी को गवाही के लिए बुलाया जाए तो सभी का पक्ष एक जैसा ही हो.

मीडिया ने सूत्रों के हवाले से ख़बर प्रकाशित की है कि प्रणब मुखर्जी ने अपने पत्र में ये सफ़ाई भी दी है कि इस दस्तावेज़ को तैयार करने की प्रक्रिया में वित्तमंत्रालय के अधिकारी कई बार कैबिनेट सचिव से भी मिले और प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों से भी.

हालांकि सरकार इस बात से इनकार करती है लेकिन चर्चा हो रही है कि ये यूपीए के मंत्रियों के बीच चल रही खींचतान का उदाहरण है.

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