तेलंगाना: सचिवालय वीरान, अख़बार ग़ायब

सचिवालय
Image caption राज्य सचिवालय के पास तैनात सुरक्षाकर्मी

अलग तेलंगाना राज्य के लिए जारी अनिश्चित कालीन हड़ताल के 17 वें दिन गुरूवार को राज्य सचिवालय पूरी तरह से बंद रहा.

कई स्थानों पर मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के घरों का घेराव किया गया, लोगों को पढ़ने के लिए कोई समाचार पत्र नहीं मिल सका क्योंकि हॉकरों ने भी तेलंगाना के समर्थन में गुरूवार को एक दिन की हड़ताल कर दी है.

सचिवालय में कर्मचारियों ने बुधवार को अपने साथियों की हुई गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया.

यह लोग तेलंगाना राज्य के पक्ष में और सरकार और पुलिस के विरुद्ध नारे लगा रहे थे.

सचिवालय के तेलंगाना कर्मचारियों की संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष नरेंद्र राव ने सचिवालय के अन्दर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर ऐतराज़ करते हुए उन्हें वहां से तुरंत हटाने की मांग की है.

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी पुलिस का उपयोग करके कर्मचारियों को डराने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन खुद ही हड़ताली कर्मचारियों से डर कर कई दिनों से अपने कार्यालय नहीं आ रहे हैं.

एक हड़ताली कर्मचारी ने बीबीसी से कहा, "मुख्यमंत्री अपने घर बैठ कर सरकार चला रहे हैं. हम भी देखेंगे कि वे कब तक ऐसा करते हैं. सब को यह समझ लेना चाहिए कि जब तक तेलंगाना राज्य नहीं बनता हम अपना आंदोलन और हड़ताल जारी रखेंगे".

हालाँकि आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र के कर्मचारी हड़ताल में भाग नहीं ले रहे हैं लेकिन गुरूवार को जब पुलिस ने हड़ताली कर्मचारियों को गिरफ़्तार कर लिया था तो वे भी प्रदर्शन में शामिल हो गए थे और उन्होंने धमकी दी थी कि अगर पुलिस ने उनके साथियों को रिहा नहीं किया तो वे भी हड़ताल पर चले जाएँगे, इसकी बाद ही गिरफ़्तार किए गए लोगों को पुलिस ने रात में रिहा कर दिया.

तेलंगाना के लिए जारी आन्दोलन के इस चरण में मीडिया भी तेलंगाना समर्थकों की नाराज़गी का निशाना बनने लगी है.

गुरूवार को तमाम हॉकरों के हड़ताल कर देने से हैदराबाद में लोगों को एक भी अख़बार नहीं मिल सका.

टीवी चैनलों को चेतावनी

इधर तेलंगाना में केबल ऑपरेटर्स के महासंघ ने दिल्ली स्थित टीवी न्यूज़ चैनलों को धमकी दी है कि अगर उन्होंने तेलंगाना आंदोलन को नज़र अंदाज़ करना बंद नहीं किया तो वे पूरे क्षेत्र में इन चैनलों का प्रसारण ही बंद कर देंगे.

तेलंगाना के लोग इस बात पर बहुत नाराज़ और निराश हैं कि अधिकतर राष्ट्रीय चैनल तेलंगाना आंदोलन की कोई ख़बर नहीं दिखा रहें हैं.

इधर हिंसा की एक घटना में निज़ामाबाद में तेलुगु देसम के उन विधायकों की बस यात्रा पर पथराव किया गया जो विधान सभा क्षेत्र बांसवाडा जा रहे थे.

उस क्षेत्र में उपचुनाव होने वाले हैं क्योंकि वहां के तेलुगु देसम विधायक पी श्रीनिवास रेड्डी विधान सभा और तेलुगु देसम से त्याग पत्र देकर तेलंगाना राष्ट्र समिति में शामिल हो गए हैं.

इस उपचुनाव में तेलुगु देसम हिस्सा नहीं ले रही है लेकिन उसके विधायक वहां पर चुनाव के बहिष्कार का प्रचार करना चाहते हैं.

तेलुगु देसम के 32 तेलंगना विधायकों ने बुधवार को विधान सभा से त्याग पात्र दिया था.

वे चाहते है कि तेलंगाना में अगर उपचुनाव होते हैं तो कोई दल उसमें हिस्सा ना लेकर एक संवैधानिक संकट पैदा करे.

इस बीच गुरूवार को तेलुगु देसम को एक और धक्का लगा जब उसके एक और विधायक गंप गोवर्धन ने पार्टी और विधान सभा से त्याग पात्र दे दिया.

निज़ामाबाद ज़िले के कामारेड्डी चुनाव क्षेत्र के विधायक गोवर्धन का आरोप है कि तेलुगु देसम अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू तेलंगाना का विरोध कर रहें हैं इसीलिए उन्होंने पार्टी छोड़ देने का फ़ैसला किया है.

गोवर्धन गुरूवार शाम को ही तेलंगाना राष्ट्र समिति में शामिल होने वाले हैं.

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