संजीव भट्ट गिरफ़्तार किए गए

  • 30 सितंबर 2011
संजीव भट्ट पुलिस की गाड़ी में इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption संजीव भट्ट को सरकार ने पहले से निलंबित कर रखा है

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट को शुक्रवार को गुजरात पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है.

पुलिस ने अहमदाबाद में उनके निवास स्थान से गिरफ़्तार किया है और घाट लोदिया थाने में ले जाया गया है.

उन पर अपने एक मातहत काम कर चुके एक अन्य पुलिस अधिकारी पर दबाव डालकर नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ हलफ़नामा दाख़िल करवाने का आरोप है.

संजीव भट्ट ने अपने हलफ़नामे में संजीव भट्ट ने कहा था कि गोधरा कांड के बाद 27 फ़रवरी, 2002 को संजीव भट्ट के निवास पर हुई बैठक में मोदी ने पुलिस अधिकारियों से कहा था कि हिंदुओं को अपना ग़ुस्सा उतारने का मौक़ा दिया जाना चाहिए.ॉ

कौन हैं संजीव भट्ट?

इसके बाद से मोदी सरकार उनसे नाराज़ है और विभिन्न आरोपों में उन्हें निलंबित भी कर दिया गया है.

आरोप

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2002 में संजीव भट्ट के एक सहयोगी रहे बीके पंत ने भी नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ हलफ़नामा दाख़िल किया था लेकिन बाद में उन्होंने कहा था कि ये हलफ़नामा उन पर दबाव डालकर दिलवाया गया था.

उनका कहना था कि चूंकि संजीव भट्ट उनके अधिकारी थे इसलिए वे इससे इनकार नहीं कर पाए.

उन्होंने पुलिस में इसकी रिपोर्ट भी दर्ज करवाई थी.

उन पर धारा 341 (ग़लत ढंग से दबाव डालना), धारा 342 (ज़बरदस्ती बंदी बनाकर रखना) और धारा 195 (सज़ा दिलवाने के लिए ग़लत सबूत पेश करना या गढ़ना) के तहत कार्रवाई की गई है.

इसमें से धारा 195 ही ऐसी धारा है जिसमें ज़मानत नहीं मिल सकती. शेष दोनों में ज़मानत हो सकती है.

यही अपेक्षित था: कांग्रेस

संजीव भट्ट की गिरफ़्तारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस ने कहा है कि नरेंद्र मोदी की सरकार वही कर रही है जिसकी अपेक्षा थी.

कांग्रेस की प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा, "इस गिरफ़्तारी से मुझे ज़रा भी आश्चर्य नहीं हुआ."

उनका कहना था कि इससे ज़ाहिर होता है कि नरेंद्र मोदी किस तरह व्यवहार करते हैं.

इस गिरफ़्तारी पर जब बीबीसी ने गुजरात सरकार के प्रवक्ता जयनारायण व्यास की प्रतिक्रिया चाही तो उन्होंने कहा, "मैं इस पर अभी कोई टिप्पणी नहीं कर सकता."

हलफ़नामा

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Image caption अपने हलफ़नामे में संजीव भट्ट ने नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं

इसी साल मार्च के महीने में संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफ़नामा दायर कर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा था कि गोधरा कांड के बाद 27 फ़रवरी, 2002 की शाम में मुख्यमंत्री की आवास पर हुई बैठक में वे मौजूद थे, जिसमें मोदी ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों से कहा था कि हिंदुओं को अपना ग़ुस्सा उतारने का मौक़ा दिया जाना चाहिए.

हालांकि सरकार का कहना है कि इस बात के कोई सबूत नहीं है कि संजीव भट्ट मुख्यमंत्री निवास में हुई बैठक में मौजूद थे.

सितंबर में राज्य सरकार ने संजीव भट्ट को निलंबित कर दिया था.

छह पन्ने के निलंबन पत्र में उन पर बिना छुट्टी के ग़ायब रहने, विभागीय जाँच समिति के सामने पेश नहीं होने और सरकारी गाड़ी के ग़लत इस्तेमाल का आरोप लगाया गया था.

बीबीसी से बातचीत के दौरान संजीव भट्ट ने अपने निलंबन की पुष्टि करते हुए कहा था कि राज्य सरकार उन्हें परेशान करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया था कि वह नहीं चाहती कि कोई भी व्यक्ति राज्य में 2002 में हुए दंगों के मामले में सरकार के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ उठाए.

इसके बाद सितंबर में ही संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में एक और हलफ़नामा दाख़िल करके कहा था कि 2002 दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी विशेष जांच दल यानी एसआईटी की जांच रिपोर्ट को राज्य के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल तुषार मेहता को लीक कर दी गई थी.

उन्होंने ये भी आरोप लगाया था कि तुषार मेहता ने ये एसआईटी की ई-मेल को संघ के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता एस गुरूमूर्ति को भेजा था.

हलफ़नामे के अनुसार बाद में इस मेल को गुरूमूर्ति ने वकील रामजेठमलानी और उनके पुत्र महेश जेठमलानी को भेजा दिया था.

ग़ौरतलब है कि रामजेठमलानी भाजपा के राज्य सभा सांसद हैं और वह तथा उनके वकील पुत्र महेश जेठमलानी गुजरात दंगों से जुड़े कई मामलों और पूर्व गृह मंत्री अमित शाह के वकील हैं.

पिछले कुछ महीनों से संजीव भट्ट और गुजरात सरकार के बीच टकराव चल रहा है.

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