'देश में आधे अध्यापक पद खाली'

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Image caption मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 14 सितंबर 2009 में इस टास्कफ़ोर्स का गठन किया था.

मानव-संसाधन विकास मंत्रालय की विशेष टास्कफ़ोर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 54 प्रतिशत प्राध्यापकों की कमी है. पहले ऐसे अनुमान लगाए गए थे कि ये कमी करीब 40 प्रतिशत है.

अभी देश में 21 छात्रों के लिए मात्र एक अध्यापक है. यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानि यूजीसी के मुताबिक करीब 14 छात्रों के लिए एक अध्यापक होना चाहिए. इस हिसाब से देश में करीब चार लाख अध्यापकों की ज़रूरत है.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 14 सितंबर 2009 में इस टास्कफ़ोर्स का गठन किया था.

दो साल की मेहनत के बाद इस टास्कफ़ोर्स ने अपनी रिपोर्ट सरकार को पेश कर दी है. टास्कफ़ोर्स के मुताबिक भारतीय कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में वर्ष 2017 तक करीब 13 लाख प्राध्यापकों की ज़रूरत है.

टास्कफ़ोर्स के मुताबिक हर साल अध्यापकों की मांग में छह प्रतिशत की वृद्धि होगी. इस रिपोर्ट को तैयार करने की प्रक्रिया में टास्कफ़ोर्स ने यूजीसी, एआईसीटीई, फ़ार्मेसी काउंसिल ऑफ़ इंडिया और बार काऊंसिल ऑफ़ इंडिया जैसी संस्थाओं से बात की.

कमेटी के मुताबिक केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अध्यापकों की ज़बरदस्त कमी है. इन विश्वविद्यालयों में जहाँ 13514 अध्यापक होने चाहिए, यहाँ 4662 पद खाली हैं.

पद खाली

छत्तीसगढ़ के गुरु घासी दास विश्वविद्यालय में सबसे ज़्यादा 65 प्रतिशत पद खाली हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 58 प्रतिशत नहीं भरे हैं जबिक दिल्ली विश्वविद्यालय इस सूची में 53 प्रतिशत के साथ तीसरे नंबर पर है.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 15.3 प्रतिशत, जामिया मिलिया इस्लामिया 14.5 प्रतिशत और विश्व भारती में 15.7 प्रतिशत अध्यापकों की कमी है.

दिल्ली विश्वविद्यालय में 910 अध्यापकों की कमी है.

राज्यों में स्थित 264 विश्वविद्यालयों में मात्र 77 के आंकड़े उपलब्ध थे. इन 77 विश्वविद्यालयों में करीब 24 हज़ार पद खाली थें, जो कि कुल पदों का करीब 33 प्रतिशत हैं.

राज्यों में स्थित विश्वविद्यालयों में सबसे बुरा हाल उत्तरी बंगाल में है.

उधर बैंगलोर स्थित नेशनल लॉ स्कूल और श्री शंकराचार्य युनिवर्सिटि ऑफ़ संसक्रित में एक पद खाली नहीं है.

टास्कफोर्स ने मानव संसाधन मंत्रालय से कहा था कि देश भर में खाली पदों को भरने को लेकर सारी जानकारी हासिल की जाए.

आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर संजय डांडे की तैयार की गई इस रिपोर्ट में टास्क फ़ोर्स ने घटिया पीएचडी को ना स्वीकारने, अध्यापकों की गुणवत्ता बढ़ाने औऱ दूसरी बातों की सिफ़ारिश की है.

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