संजीव भट्ट जेल भेजे गए

संजीव भट्ट को ले जाती पुलिस इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption संजीव भट्ट ने मीडिया से कहा है कि उनके पास कहने को बहुत कुछ है लेकिन वे बाद में कहेंगे

अहमदाबाद की एक अदालत ने निलंबित आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को सोमवार तक के लिए न्यायिक हिरासत में साबरमति जेल भेज दिया है.

सोमवार को संजीव भट्ट की ज़मानत याचिका पर सुनवाई होगी.

गुजरात पुलिस ने संजीव भट्ट को पुलिस हिरासत में देने की मांग की थी लेकिन अदालत ने इसे नामंज़ूर कर दिया.

अपने एक मातहत सिपाही केडी पंत से कथित तौर पर दबाव डालकर हलफ़नामा दाख़िल करवाने का आरोप है. पंत की पुलिस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने शुक्रवार को संजीव भट्ट को उनके निवास से गिरफ़्तार किया था.

संजीव भट्ट वही पुलिस अधिकारी हैं जिन्होंने गत मार्च में वर्ष 2002 के दंगों के मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ हलफ़नामा दायर किया था.

इस हलफ़नामे में संजीव भट्ट ने कहा था कि गोधरा कांड के बाद 27, फ़रवरी, 2002 को नरेंद्र मोदी के निवास पर हुई बैठक में उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा था कि नाराज़ लोगों को ग़ुस्सा निकालने का मौक़ा दिया जाना चाहिए.

बाद में उन्होंने हाईकोर्ट में दायर एक और हलफ़नामे में नरेंद्र मोदी पर हरिन पांड्या की हत्या के सबूत मिटाने की कोशिशों के आरोप भी लगाए थे.

उनकी गिरफ़्तारी की तीख़ी राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई है. लेकिन भाजपा ने इसे क़ानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है.

पत्नी की आशंका

इससे पहले संजीव भट्ट की गिरफ़्तारी के एक दिन बाद उनके परिवार ने उनकी जान की रक्षा को लेकर चिंता जताई और पुलिस के आला अधिकारियों को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई .

संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट ने कहा है, "शुक्रवार को हुई गिरफ़्तारी के बाद से मुझे संजीव से मिलने नहीं दिया गया है. पुलिस अधिकारी उनके वकील को भी उनसे मिलने नहीं दे रहे हैं. ऐसे में हम उनकी ज़मानत याचिका कैसे दायर कर सकते हैं."

लेकिन गुजरात पुलिस ने संजीव भट्ट की पत्नी की ओर से उनकी जान को लेकर जताई जा रही आशँकाओं को 'निराधार' कहकर ख़ारिज कर दिया है.

अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर सुधीर सिन्हा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा,"हम भट्ट की ज़िंदगी को कोई ख़तरा नहीं है. जो आशंका उनकी पत्नी ने ज़ाहिर की है वह निराधार है."

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार संजीव भट्ट की पत्नी ने कहा है, "संजीव के ख़िलाफ़ घाटलोदिया पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है और इसके बाद उन्हें क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है, जिसे एनकाउंटर विशेषज्ञ माना जाता है, मैं उन पर भरोसा नहीं कर सकती. मुझे उनकी जान की चिंता है."

श्वेता भट्ट ने कहा है, "कल (शुक्रवार को) 35-40 पुलिसकर्मियों ने बिना किसी सूचना के हमारे घर की दो घंटों से अधिक समय तलाशी लेते रहे. वे संजीव को अपने साथ ले गए और तब से उनसे हमारा कोई संपर्क नहीं है."

उनका कहना है कि इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने गुजरात के पुलिस महानिदेशक चित्तरंजन सिंह, अहमदाबाद के कमिश्नर सुधीर सिन्हा और स्थानीय अदालत के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को पत्र लिखा है और न्याय की गुहार की है.

उनको लगता है कि उन्हें गुजरात में कभी भी न्याय नहीं मिल सकता.

फिर तलाशी की कोशिश

गुजरात पुलिस ने शनिवार को दूसरी बार आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के घर की तलाशी लेने का प्रयास किया.

लेकिन पुलिस को ख़ाली हाथ वापस लौटना पड़ा जब उनकी पत्नी श्वेता भट्ट ने पुलिस अधिकारियों से तलाशी के वारंट के बारे में पूछा.

श्वेता भट्ट ने पीटीआई को बताया, "आज (शनिवार को) क़रीब 30-35 पुलिस अधिकारी फिर से हमारे घर की तलाशी लेने आए थे. लेकिन मैंने उनका विरोध किया और कहा कि वे नया तलाशी वारंट दिखाएं लेकिन उन्होंने जो दिखाया वो शुक्रवार का ही तलाशी वारंट था."

उनका कहना था, "मैंने उनसे कहा कि शुक्रवार के तलाशी वारंट से दो बार तलाशी लेना हमें परेशान करना है. एक ही वारंट के आधार पर वे हमारे घर की दो बार तलाशी नहीं ले सकते."

श्वेता का कहना है कि इसके बाद पुलिस वाले वापस लौट गए.

उल्लेखनीय है कि पुलिस ने शुक्रवार को भी दो घंटों तक उनके घर की तलाशी ली थी.

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