'भारत अफ़गान सैन्य मामलों से दूर ही रहे'

  • 3 अक्तूबर 2011
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Image caption हामिद करज़ई बढ़ी हुई भारतीय भूमिका की उम्मीद से ही मंगलवार शाम दिल्ली पहुंचेंगे

अफ़गानिस्तान में भारत के पूर्व राजदूत आईपी खोसला का मानना है कि भारतीय हित इसी में है कि वो अफ़गानिस्तान से वैसे ही संबंध बरक़रार रखे जैसे अब तक रहे हैं.

गौरतलब है कि अफ़गानिस्तान में तेज़ी से बदलते घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति हामिद करज़ई मंगलवार से भारत की यात्रा पर आ रहे हैं.

माना जा रहा है कि राष्ट्रपति करज़ई भारतीय नेतृत्व से मुलाक़ात कर आपसी रिश्ते और मज़बूत करने के प्रयास तेज़ करेंगे.

हामिद करज़ई और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बीच विस्तृत बातचीत होनी है और कयास लग रहे हैं कि दोनों देश एक सामरिक समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे.

दोनों पक्षों के बीच कुछ अहम खनिज क़रार होने की भी संभावना जताई जा रही है.

स्थिरता के प्रयास

अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति की यात्रा अहम इसलिए भी बताई जा रही है क्योंकि उनके देश में शांति प्रयासों में जुटे पूर्व राष्ट्रपति बरहानुद्दीन रब्बानी की कुछ दिन पहले एक आत्मघाती हमले में हत्या कर दी गई थी.

शक की सुई पकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई से कथित तौर पर रिश्ते रखने वाले हक्क़ानी गुट पर टिकी थी हालाँकि आईएसआई और हक्क़ानी गुट ने आपसी संबंधों से इनकार किया है.

लेकिन बीबीसी से हुई विशेष बातचीत में अफ़गानिस्तान में भारत के पूर्व राजदूत आईपी खोसला ने साफ़ कहा है कि भारत को अफ़गानिस्तान में स्थिरता लाने के पक्ष में कोई ख़ास क़दम लेने से पहले सोच समझ कर फ़ैसला करना चाहिए.

उन्होंने कहा, "भारत को तय करना होगा कि वो किस हद तक जाकर अफ़गानिस्तान में पुनर्निर्माण में मदद कर सकता है. क्योंकि इस बात में कोई श़क नहीं है कि भारत के पडोसी देश तो बढ़ी हुई भारतीय भूमिका नहीं देखना चाहते."

'फ़ौजी मदद से दूर रहे भारत'

बरहानुद्दीन रब्बानी की हत्या के बाद से अफ़गानिस्तान के कई अधिकारी ऐसे बयान दे चुके हैं कि उनके पास पुख्ता सुबूत हैं की इस हत्या में कथित पाकिस्तानी मदद शामिल थी.

जहाँ अफ़ग़ानिस्तान एक तरफ़ पाकिस्तान से अपने संबंधों के बारे में पुनर्विचार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति करज़ई ये भी कहते रहे हैं कि उनकी सरकार अमरीका, यूरोप और भारत के साथ मिल कर देश के भविष्य पर योजना बनाएंगे.

लेकिन पूर्व राजदूत आईपी खोसला के मुताबिक़ भारत को फ़ौजी मदद देने का फैसला करने से बचना चाहिए. आई पी खोसला ने बीबीसी से कहा, "भारत की भूमिका रही है कि वो अफ़गानिस्तान के फ़ौजी मामलों में हाथ नहीं डालता है. भारत को आगे भी फ़ौजी मदद से बचना चाहिए क्योंकि आर्थिक मदद के बाद फ़ौजी मदद से आयाम बदल जाता है."

राष्ट्रपति हामिद करज़ई की भारत यात्रा इसलिए भी अहम बताई जा रही है क्योंकि पिछले कुछ दिनों में अमरीका और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बहुत मधुर नहीं रहे हैं.

जहाँ अमरीकी सरकार ने कई बार पाकिस्तान को चरमपंथी संगठनों से दूरी बनाने की कड़ी हिदायतें दी हैं वहीँ पाकिस्तान सरकार ने भी खुल कर अमरीकी दावों को सिरे से खारिज किया है.

ज़ाहिर है, अपनी भारत यात्रा के दौरान अफ़गानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई के ज़हन में ये सभी बातें रहेंगी और वे बढ़ी हुई भारतीय भूमिका की उम्मीद से ही मंगालवार शाम दिल्ली पहुंचेंगे.

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