तेलंगाना में निराशा, तनाव और बढ़ा

  • 3 अक्तूबर 2011
तेलंगाना आंदोलन (फ़ाइल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट AP
Image caption तेलंगाना आंदोलन 21वें दिन में प्रवेश कर गया

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से दिल्ली में तेलंगाना आंदोलन के 40 नेताओं की मुलाकात के बाद केंद्र सरकार की ओर से कोई स्पष्ट बात न कहे जाने पर तेलंगाना क्षेत्र के लोगों में नाराज़गी और निराशा बढ़ रही है. तनाव के कारण हिंसा का ख़तरा भी बना हुआ है.

सोमवार को तेलंगाना क्षेत्र के अध्यापकों समेत हज़ारों कर्मचारियों की अनिश्चिकालीन हड़ताल का 21वां दिन था और आंध्र प्रदेश में तेलंगाना क्षेत्र की सीमा पर युद्ध के मैदान जैसा दृश्य था.

नलगोंडा में आंदोलनकारियों ने आंध्र प्रदेश के अन्य हिस्सों से आने वाली दर्जनों निजी बसों को निशाना बनाया और उनके शीशे तोड़ डाले. इन बसों में विजयवाडा और आंध्र के दूसरे नगरों से लोग हैदराबाद आ रहे थे.

निजी बसों के शीशे तोड़े

पुलिस के मुताबिक आंदोलनकारियों ने नक्रेकल, चौट उप्पल और अन्य स्थानों पर इन बसों को रोका और पथराव कर के उन के शीशे तोड़ डाले. ये बसें कई घंटे तक वहीं फंसीं रहीं और यात्रियों को काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ा. पथराव में एक पुलिस अधिकारी को सिर पर चोट आई. स्थिति के नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और 10 लोगों को हिरासत में ले लिया. अलग तेलंगाना राज्य के समर्थकों ने तेलंगाना और रायलसीमा क्षेत्र के बीच चलने वाली निजी बसों को भी ऐसे ही हमलों का निशाना बनाया. उन्होंने एक बस को आग लगा दी जिसके मालिक कांग्रेस के एक विधायक और पूर्व मंत्री दिवाकर रेड्डी के भाई हैं.

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Image caption हड़ताल और बिजली के संकट के कारण किसानों को सात घंटे की बिजली भी नहीं मिल रही

उनका कहना था कि जब रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन के कर्मचारी हड़ताल पर हैं और बसें नहीं चला रही हैं, ऐसे समय में वे ग़ैर तेलंगाना क्षेत्र के पूंजीपतियों की निजी बसों को चलने की अनुमति नहीं दे सकते.

उन्होंने धमकी दी है कि यदि तेलंगाना मुद्दे पर केंद्र जल्द फ़ैसला नहीं करता तो वे रायलसीमा को आंध्र प्रदेश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले राजमार्गों को पूरी तरह बंद कर देंगे.

हालाँकि मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने अधिकारीयों को विशेष बसें चलने का आदेश दिया है लेकिन आंदोलन के कारण वो भी नहीं चल पा रही हैं.

बिजली का संकट गहराया

राज्य में बिजली का संकट और भी गहरा गया है. हैदराबाद में बिजली की कटौती को दो घंटे से बढाकर चार घंटे करना पड़ा है. अन्य जिलों और ग्रामीण इलाकों में तो बारह घंटे तक बिजली की कटौती करनी पड रही है. किसानों को कम बिजली मिलने से उनकी फसलें सूख जाने का ख़तरा पैदा हो गया है. मुख्यमंत्री ने इस स्थिति के लिए तेलंगाना आंदोलन के नेताओं - चंद्रशेखर राव और कोदंडा राम को जिम्मेदार ठहराया है. लेकिन तेलंगाना क्षेत्र के कांग्रेसी नेताओं और बिजली विभाग के कर्मचारियों ने इसका खंडन करते हुए कहा है की मुख्यमंत्री जानबूझकर यह संकट बढा रहे हैं ताकि तेलंगाना के किसानों को तेलंगाना के नेताओं के विरुद्ध भड़का सकें. कांग्रेस के एक सांसद मधु याश्की ने धमकी दी की अगर किसानों को पूरे सात घंटे बिजली नहीं दी गई तो वो भी आंदोलनकारियों के साथ मिल जाएँगे.

हर दिन अलग तेलंगाना राज्य के समर्थन में कहीं न कहीं से आत्महत्या की ख़बर आ रही है. इसके बाद तेलंगाना के वकीलों ने सोमवार को हैदराबाद की हुसैन सागर झील के बीच स्थित बुद्ध की मूर्ती के पास धरना दिया और पोलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. अलग तेलंगाना राज्य के समर्थक जिनमें चंद्रशेखर राव, कोदंडा राम और अन्य नेता शामिल थे, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले और शिकायत की कि मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी पुलिस का दुरुपयोग कर शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने केंद्र मंत्री जयपाल रेड्डी से भी भेंट की और अन्य कांग्रेसी नेतोँ से भी मांग की कि वो सात अक्तूबर तक त्यागपत्र देकर आन्दोलन में शामिल हो जाएँ.

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