माओवादियों की संघर्षविराम की घोषणा

  • 4 अक्तूबर 2011
माओवादी (फ़ाइल) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption पश्चिम बंगाल में सीपीआई (माओवादी) ने इस साल 27 जुलाई को भी बातचीत की पेशकश की थी पर कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था

पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) ने एक महीने के एकतरफ़ा संघर्षविराम की घोषणा की है. सोमवार से शुरु हुआ ये संघर्षविराम एक महीने तक जारी रहेगा.

बीबीसी संवाददाता सुवोजीत बागची के अनुसार माओवादी चाहते हैं कि इससे यदि परिस्थितियाँ बेहतर होती हैं तो फिर दोनों पक्षों के बीच बातचीत हो.

हालाँकि पश्चिम बंगाल की सरकार ने फ़िलहाल सीपीआई (माओवादी) की इस घोषणा पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

ग़ौरतलब है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने इस साल 27 जुलाई को भी पश्चिम बंगाल की सरकार के साथ बातचीत शुरु करने की इच्छा जताई थी लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला था.

'गेंद सरकार के पाले में'

बीबीसी के साथ बातचीत में सरकार द्वारा माओवादियों के साथ बातचीत करने के गठित समिति के अध्यक्ष सिजातो भद्रा ने कहा, "अब सरकार को तय करना है वह क्या चाहती है? माओवादियों की संघर्षविराम की घोषणा सोमवार से लागू हो गई है और माओवादी चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल की सरकार भी ऐसी ही घोषणा करे जिससे बातचीत का एक रास्ता खुले."

सीपीआई (माओवादी) ने एक बयान भी जारी किया है जिसमें कहा गया है कि यदि सरकार का रुख़ सकारात्मक रहता है तो वे अपने मध्यस्थों के नामों की घोषणा करेंगे और फिर बातचीत शुरु हो सकती है.

इस बयान पर जिन लोगों के हस्ताक्षर हैं, वे हैं - कॉमरेड आकाश, जो पश्चिम बंगाल सीपीआई (माओवादी) के सचिव हैं, सरकार की ओर से गठित समिति के अध्यक्ष मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रोफ़ेसर सुजातो भद्रा और छोटन दास, जो सीपीआई (माओवादी) के सदस्य रह चुके हैं.

इससे पहले जब माओवादी पार्टी की पश्चिम बंगाल शाखा ने 27 जुलाई को बातचीत की पेशकश की थी तब राज्य सरकार ने नागरिक समाज के ग्रुप की घोषणा की थी जिसे ममता बनर्जी ने माओवादियों के साथ मध्यस्थता का काम सौंपा था.

उस समय भी माओवादियों ने बातचीत के लिए कोई पूर्व शर्त नहीं रखी थी.

पश्चिम बंगाल में अप्रैल में हुए चुनावों में प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने बार-बार माओवादियों से हथियार डाल कर बातचीत में शामिल होने की अपील की थी.

उन्होंने माओवादियों के ख़िलाफ़ अभियान रोकने की भी बात कही थी. लेकिन मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद ममता बनर्जी ने माओवादी प्रभावित इलाक़ों से सुरक्षाकर्मियों को नहीं हटाया है.

हालाँकि उन्होंने 52 राजनीतिक क़ैदियों को रिहा करने का आदेश दिया था. लेकिन इन राजनीतिक क़ैदियों की सूची में सिर्फ़ एक वरिष्ठ माओवादी नेता थे.

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