राजीव हत्याकांड के तथ्यों पर सीबीआई ने भूल सुधारी

  • 5 अक्तूबर 2011
राजीव गांधी
Image caption 21मई 1991को श्रीपेरंबदूर में आत्मघाती हमलावर धनु ने ख़ुद को उड़ा कर राजीव गांधी की हत्या कर दी थी.

राजीव गांधी हत्याकांड में आत्मघाती हमलावर धनु को ज़िंदा बताकर फांसी की सज़ा दिलवाकर ख़ुद की पीठ थपथपाने वाली सीबीआई ने अपनी वेबसाइट पर इस ग़लती को सुधार दिया है.

इससे पहले, भारी चूक करते हुए सीबीआई ने मंगलवार को अपनी वेबसाइट पर कहा था कि 1991 में श्रीपेरंबदूर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर हमला करने वाली धनु के ख़िलाफ़ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में सफलतापूर्वक मुकदमा चलाया और बाद में उसे सर्वोच्च अदालत ने फांसी की सजा सुनाई.

राजीव गांधी हत्याकांड एकमात्र बड़ा मामला है जिसे सीबीआई की वेबसाइट" सीबीआई डॉट एनआईसी डॉट इन" के होम पेज पर जगह दी गई है और उसमें उसकी जांच की सराहना की गई है.

हांलाकि इस भारी भूल का पता चलते ही सीबीआई ने अपनी वेबसाइट से तथ्यों को ठीक कर दिया.

वेबसाइट पर दिए गए इस मामले के ब्यौरे के मुताबिक चेन्नई की टाडा अदालत ने मुकदमे में सभी 26 अभियुक्तों को मृत्युदंड दिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इनमें से धनु समेत चार लोगों को ही मौत की सज़ा सुनाई. बाक़ी अन्य को अलग-अलग अवधि के कारावास की सजा सुनाई गई.

थेनमोझी राजरत्नम उर्फ़ धनु

21 मई, 1991 को श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी पर हुए इस हमले में धनु एलटीटीई की आत्मघाती हमलावर थी. उसने शरीर से विस्फोटक बांध रखे थे और राजीव गांधी के पैर छूते ही उसने धमाका कर ख़ुद को उड़ा दिया था.

वेबसाइट में कहा गया है सुराग मिलने के बाद एसआईटी ने तेज़ी से काम किया और 60 दिनों में पूरी साजिश को सामने रख दिया.

90 दिनों के भीतर साजिश के सभी मुख्य पात्रों को ग़िरफ्तार कर लिया गया.

करीब छह महीने के भीतर ही एसआईटी सभी अपराधियों के ख़िलाफ़ टाडा के तहत मुकदमा चलाने को तैयार थी.

इसमें कहा गया है, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और उसके विशेष जांच दल, एसआईटी की अच्छा काम करने के लिए तारीफ़ की थी.

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