स्कूलों में बंद हो 'जंक फ़ूड': दिल्ली हाईकोर्ट

  • 6 अक्तूबर 2011
जंक फ़ूड
Image caption कई मामलों में पाया गया कि बच्चों को टिफ़िन में जंक फ़ूड दिया जा रहा है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि स्कूलों व कॉलेजों की कैंटीनों में कोल्ड ड्रिंक्स और जंक फूड पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए. अदालत ने ये निर्देश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए जिसमे मांग की गई थी कि स्कूलों के 1500 फ़ीट के दाएरे के भीतर जंक फ़ूड की बिक्री पर रोक लगाई जाए.

अदालत के निर्देश के बाद जनहित याचिका दायर करने वाले राहुल वर्मा ने बीबीसी को बताया, "जब मैं स्कूलों में निरीक्षण करने गया तो दंग रह गया. छोटे-छोटे बच्चे एसिडिटी की वे दवाइयां खाते मिले जो आमतौर पर 40-50 की उम्र के लोग खाते हैं. बर्गर, कोल्ड ड्रिंक्स और स्नैक्स के अलावा ज़्यादातर को अब कुछ पसंद ही नहीं आ रहा."

वैसे मामले की सुवाई के दौरान जज एके सीकरी और सिद्धार्थ मृदुल की पीठ ने भी जंक फूड से सेहत को ख़तरा बताया. उनका कहना था, ''हम सिर्फ बातें नहीं चाहते हैं. हम चाहते हैं कि सरकार शिक्षा संस्थानों के नज़दीक जंक फूड की बिक्री और सप्लाई पर पूरी तरह प्रतिबंध सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए. आपने जो हलफ़नामा दाख़िल किया है, उससे हम संतुष्ट नहीं हैं." दिल्ली हाई कोर्ट की यह बेंच स्कूल/कॉलेजों के नजदीक जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी

बच्चों की गिरती सेहत

मामले को एक जनहित याचिका के ज़रिये कोर्ट तक पहुंचाने का काम ग़ैर सरकारी संस्था 'उदय फाऊंदेशन' ने किया है. इसके संस्थापक राहुल वर्मा कोर्ट के निर्देश के बाद बेहद ख़ुश दिखे.

बीबीसी से हुई बातचीत में राहुल ने बताया, "हमारा आग्रह करने पर बहुत से स्कूलों ने तो जंक फ़ूड से दूरी बना ली. लेकिन कई स्कूल ऐसे भी हैं जिनके यहाँ वार्षिक समारोहों को बड़ी-बड़ी सॉफ़्ट ड्रिंक कंपनियां प्रायोजित करती हैं. अब इनका क्या किया जाए. लेकिन इस आदेश के बाद फ़र्क ज़रूर पड़ेगा."

राहुल वर्मा ने इस बात पर भी ज़ोर दिया की छोटे बच्चों की गिरती सेहत बेहतर बनाने के लिए स्कूलों के अलावा घर में माँ-बाप और परिवार का भी भरपूर सहयोग मिलना चाहिए.

उनका कहना था कि कई मामलों में 'बच्चों को टिफ़िन में ही जंक फ़ूड दिया जाता है.' मामले में अब अदालत ने केंद्र सरकार से 2 नवंबर तक एक रिपोर्ट पेश कर यह बताने के लिए कहा है कि उसने इस मामले में क्या कदम उठाए गए हैं.

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