अन्ना का आंदोलन एक मज़ाक है: बाल ठाकरे

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Image caption बाल ठाकरे अपने विविदित बयानों की वजह से भी सुर्ख़ियों में रहे हैं.

शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने समाजसेवी अन्ना हज़ारे के आंदोलन को एक मज़ाक क़रार दिया है.

दशहरे के मौक़े पर पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए बाल ठाकरे ने कहा, "उनके आस-पास मौजूद लोगों ने उनके भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को एक मज़ाक़ में तब्दील कर दिया है. अन्ना, इस देश से भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं होगा. इसमें बड़े-बड़े लोग शामिल हैं. आपका जाल फट जाएगा लेकिन ये मछलियां पकड़ में नहीं आएंगी."

बाल ठाकरे ने अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल और किरण बेदी से भी कुछ सवाल किए.

शिव सेना के सहयोगी राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी में अन्ना हज़ारे के आंदोलन को लेकर ज़बर्दस्त उत्साह देखा गया है.

पार्टी न सिर्फ़ अन्ना हज़ारे के उठाए गए हर मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश करती रही है बल्कि कई हल्क़ों में तो आरोप लगाए गए थे कि आंदोलन का पूरा आयोजन ही पार्टी के पैतृक संगठन और उससे जुड़ी कुछ संस्थाओं ने गुपचुप तौर पर किया था.

भाजपा से अलग

हज़ारे के जंतर-मंतर पर किए गए पहले भूख हड़ताल में तो उनका समर्थन देने के लिए राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ नेता राम माधव और बीजेपी लीडर और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी पहुंची थीं.

इसको लेकर सवाल भी उठाए गए थे कि अराजनीतिक कहे जाने वाले इस आंदोलन में पार्टी विशेष के लोग क्यों पहुंच रहे हैं.

ये भी कहा जा रहा है कि लालृष्ण आडवाणी देश में बन गए उसी मूड का फ़ायदा अपनी नई यात्रा के ज़रिए उठाने की कोशिश कर रहे हैं.

ख़बरों के मुताबिक़ बाल ठाकरे ने अपने भाषण में साथ ही ये भी सवाल उठाया कि अन्ना हज़ारे के आंदोलन के दौरान राजघाट पर जो लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई थी उसके खाने-पीने का इंतज़ाम कौन कर रहा था?

हज़ारे के आंदोलन से जुड़े अरविंद केजरीवाल ने साफ़ किया था कि खाने-पीन और बक़िया कई तरह के इंतज़ाम अन्ना के व्यक्तिगत समर्थकों और संस्थाओं की तरफ़ से किए गए थे.

हालांकि कुछ जानकार ये भी कह रहे हैं कि बाल ठाकरे के बयानों को अन्ना हज़ारे के आंदोलन के विरोध में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि एक सकारात्मक आलोचना.

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