बिलकुल...अन्ना ख़ुद को संसद से ऊपर रख रहे हैं: केजरीवाल

  • 9 अक्तूबर 2011
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Image caption केजरीवाल ने इन आलोचनाओं को खारिज़ किया कि अन्ना का आंदोलन मात्र कांग्रेस विरोध तक सीमित है

जनलोकपाल विधेयक के समर्थन में आंदोलन करने वाली टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल का कहना है कि अन्ना संसद से ऊपर हैं और वो एक नागरिक की हैसियत से संसद पर दबाव डाल सकते हैं.

केजरीवाल का कहना था, "बिल्कुल, अन्ना खुद को संसद से ऊपर रख रहे हैं. हर नागरिक संसद से ऊपर है. मैं सावधान करता हूं आपको. हर नागरिक संसद से ऊपर है. नागरिक को ये अधिकार है कि वो संसद को बताए कि वो अपना काम ठीक से नहीं कर रही है."

सीएनएन आईबीएन टेलीविज़न के कार्यक्रम डेविल्स एडवोकेट में अरविंद केजरीवाल का कहना था, "नागरिक संसद से ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है. मेरे हिसाब से तो यह हमारे संविधान में लिखा हुआ है. अन्ना हज़ारे और हर नागरिक सर्वोच्च है. मुझे लगता है कि ये संविधान कहता है."

केजरीवाल से यह पूछा गया था कि क्या हजारे खुद को संसद से ऊपर समझते हैं और वो विधेयक पारित कराने के लिए बार बार अनशन करने की धमकी को कैसे सही बता सकते हैं.

'उत्तर प्रदेश में भाजपा भी निशाने पर'

केजरीवाल ने हिसार में कांग्रेस के विरोध में प्रचार करने का बचाव किया और कहा कि यह सत्तारुढ़ पार्टी का काम है कि वो जनलोकपाल बिल को पारित करवाए.

उन्होंने कहा कि जब हज़ारे ने कहा कि वो कांग्रेस के विरुद्ध प्रचार करेंगे तो उनका मतलब पूरे यूपीए से था.

उन्होंने इन आलोचनाओं को भी ख़ारिज़ करने की कोशिश की कि अन्ना का आंदोलन कांग्रेस विरोध है. केजरीवाल का कहना था कि वो उत्तर प्रदेश में बीजेपी के ख़िलाफ़ भी प्रचार कर सकते हैं अगर वो जनलोकपाल पर समर्थन नहीं देंगे.

उनका कहना था, ‘‘ अगर बीजेपी अपने वादे से मुकरती है तो हम यूपी चुनावों में उनके ख़िलाफ़ भी प्रचार करेंगे.’’

अन्ना हज़ारे ने लोगों से अपील की है कि वो हिसार में हो रहे उपचुनावों में कांग्रेस को वोट न दें. इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि वो ऐसे किसी को भी वोट न दें जो जनलोकपाल के समर्थन में नहीं आता.

यह पूछे जाने पर कि बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता मसलन अरुण जेटली कह चुके हैं कि वो जनलोकपाल के कई पहलूओं से सहमत नहीं हैं तो केजरीवाल का कहना था, ‘‘ बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने पत्र लिखकर समर्थन जताया है जनलोकपाल को. मैं फिलहाल उन्हीं की बात को मानूंगा.’’

उनका कहना था कि अगर कोई पार्टी संसद में अपने वादे से मुकरती है तो फिर कभी न कभी पार्टी को चुनावों का सामना करना ही पड़ेगा.

केजरीवाल ने कांग्रेस पार्टी की कड़ी आलोचना की और कहा कि पार्टी राजनीति कर रही है और अन्ना के आंदोलन को खत्म करना चाहती है.

उन्होंने यूपीए के घटक दलों का नाम नहीं लिया और कहा कि घटक दलों की बात पर कम ही ध्यान दिया जाता है.

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने बसपा और सपा के खिलाफ़ प्रचार करने की घोषणा क्यों नहीं की है जबकि ये पार्टियां साफ कर चुकी हैं कि वो जनलोकपाल के पूर्ण समर्थन में नहीं हैं तो केजरीवाल का कहना था कि बिल पास कराने में इन दलों का कोई योगदान नहीं होता.

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