काले धन पर आडवाणी ने श्वेत पत्र मांगा

  • 12 अक्तूबर 2011
अरुण जेटली और सुषमा स्वराज के साथ लालकृष्ण आडवाणी
Image caption आडवाणी ने जन चेतना यात्रा के दौरान भ्रष्टाचार के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है

भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने केंद्र सरकार से माँग की है कि वह देश से बाहर बैंकों में जमा भारतीय काले धन के बारे में संसद के अगले शीतकालीन अधिवेशन में श्वेत पत्र पेश करे.

'जन चेतना यात्रा' के सिलसिले में पटना पहुँचे आडवाणी ने संवाददाताओं से बातचीत में ये माँग की.

उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के हवाले से बताया, ''वर्ष 1948 से लेकर 2008 के बीच भारत ने 213 अरब डॉलर की राशि नाजायज़ पूँजी पलायन के रूप में गंवाई और मौजूदा वास्तविक मूल्य के आधार पर की गई गणना के मुताबिक़ यह राशि लगभग 462 अरब डॉलर हो गई है.''

भारतीय मुद्रा में एक अरब डॉलर की राशि लगभग पचास अरब रुपयों के बराबर होगी.

आडवाणी कहते हैं कि रेमंड बेकर लिखित एक पुस्तक ने काले धन के बारे में जो तथ्य खोले हैं, वे अब तक के सबसे अधिक प्रामाणिक आकलन या लेखा-जोखा माने जा रहे हैं.

आडवाणी का कहना है कि ' स्विस बैंक ' ने जो विवरण दिया है, उसके मुताबिक़ वहाँ सबसे अधिक लगभग डेढ़ खरब डॉलर भारतीयों के जमा हैं और उसके बाद रूस, ब्रिटेन ओर चीन का नंबर आता है.

उन्होंने काले धन से जुड़े इतने गंभीर मसले पर मनमोहन सिंह सरकार के रवैये को टाल-मटोल वाला बताते हुए आपत्तिजनक कहा, ''संसद के आगामी सत्र में ही श्वेत पत्र लाकर यह सरकार देश को बताए कि विदेशों में भारतीयों का कितना काला धन जमा है और उसे वापस लाने के लिए केंद्र सरकार ने कौन से कारगर क़दम उठाये हैं."

आडवाणी ने साथ ही ये भी माँग की कि इस बाबत कुछ देशों ने जिन भारतीयों के नाम सरकार को बताए हैं, उन्हें तुरंत सार्वजनिक किया जाए.

आडवाणी की यात्रा से संबंधित जितनी सभाएँ बिहार में हुईं, उनमें सबसे ज़्यादा ज़ोर उन्होंने काले धन के मुद्दे पर ही डाला. लोगों के मन में आडवाणी ये बिठाने की कोशिश कर रहे हैं कि दाल में ज़रूर कुछ काला है, जिसे मनमोहन सरकार छिपा रही है.

पटना में जब पत्रकारों ने प्रधानमंत्री पद और नरेंद्र मोदी से जुड़े विवादों पर उनसे कुछ कुरेदने वाले सवाल किए तो उन्होंने टालते हुए सिर्फ़ एक पंक्ति का अपना पुराना जवाब दुहरा दिया कि वक़्त आने पर पार्टी यह फ़ैसला करेगी.

उन्होंने अपनी यात्रा के बारे में नरेंद्र मोदी के लिखे ब्लॉग पढ़ लेने और इस बात को आगे और नहीं खींचने का अनुरोध किया. नरेंद्र मोदी ने आडवाणी की यात्रा को सराहनीय कहा है.

उस समय आडवाणी के अगल-बगल बैठे अरुण जेटली और सुषमा स्वराज थोड़ा सकपका गए, जब उन्हें भी प्रधानमंत्री पद के दावेदार बताने संबंधी सवाल आडवाणी से पूछे गये.

इस बाबत नीतीश कुमार की कथित महत्वाकांक्षा वाले प्रश्न पर भी भाजपा के तीनो दिग्गज कुछ बोलने से कतराते रहे.

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