हटाया जा सकता है सेना विशेषाधिकार क़ानून

Image caption आफ़्सपा हटाने पर विचार मंगलवार को उमर अब्दुल्ला और गृह मंत्री पी चिदंबरम के बीच हुई बातचीत के बाद हुआ.

विवादों से घिरा सेना विशेषाधिकार क़ानून (एएफएसपीए) जल्द ही भारत प्रशासित कश्मीर के कुछ हिस्सों से हटा लिया जाएगा.

मंगलवार को राज्य मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और गृह मंत्री पी चिदंबरम के बीच हुई बैठक में राज्य की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा हुई.

बैठक के बाद उमर अब्दुल्ला ने मीडिया को बताया कि उन्होंने भारत प्रशासित कश्मीर में पिछले महीनों रही सुरक्षा स्थिति की जानकारी गृह मंत्री को दी.

उन्होंने कहा, “बैठक के दौरान हमने राज्य के कुछ क्षेत्रों में लागू किया गए सेना विशेषाधिकार क़ानून और अशांत क्षेत्र अधिनियम को हटाने के मुद्दे पर चर्चा की. राज्य लौट कर मैं अपने कैबिनट सदस्यों और अफ़सरों से बात करूंगा ताकि इस पर सर्वसम्मति से फ़ैसला लिया जा सके.”

हालांकि उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि ये बदलाव रातों-रात नहीं हो सकता. उनका कहना था, “हमें उन इलाक़ों को चिन्हित करना होगा जिनमें सेना की कम से कम मौजूदगी है. उसके बाद ही हम अशांत क्षेत्र अधिनियम हटाएंगें, जिसके बाद आफ़्सपा यानि सेना विशेषाधिकार क़ानून वहां से वापस ले लिया जाएगा.”

जब उनसे कश्मीर में वार्ताकारों की अंतिम रिपोर्ट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “मेरा ये मानना है कि वार्ताकारों की नियुक्ति भारत प्रशासित कश्मीर की समस्याओं को संबोधित करने की दिशा में उठाया गया एक अच्छा कदम था. मुझे उम्मीद है कि केंद्र सरकार जल्द ही उनकी रिपोर्ट के सुझावों पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाएगी. मैं उम्मीद करता हूं कि रिपोर्ट में से कुछ सकारात्मक ही निकल कर आएगा.”

भारत प्रशासित कश्मीर के विभिन्न गुटों से बातचीत करने के लिए पिछले साल सरकार ने तीन सदस्यीय वार्ताकार समिति बनाई थी.

पूर्व सूचना आयुक्त एमएम अंसारी, शिक्षाविद राधा कुमार और जाने-माने पत्रकार दिलीप पडगांवकर पिछले एक साल के दौरान जुटाई जानकारी के आधार पर सुझावों के सहित एक रिपोर्ट आज गृह मंत्री पी चिदंबरम को सौंपने वाले हैं.

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