शिवानी हत्याकांड से आरके शर्मा बरी

दिल्ली उच्च न्यायालय

दिल्ली उच्च न्यायालय ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आरके शर्मा को 1999 में हुई पत्रकार शिवानी भटनागर की हत्या के आरोप से बरी कर दिया है.

न्यायालय ने शर्मा के अलावा दो और लोगों सत्य प्रकाश और श्रीभगवान को भी बरी कर दिया जबकि हत्या करने के आरोप में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे प्रदीप शर्मा की सज़ा बरक़रार रखी गई है.

आरके शर्मा और उनके साथ बरी किए जा रहे दो लोगों पर हत्या के षड्यंत्र का आरोप था.

न्यायालय ने कहा कि आरके शर्मा को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फ़ैसला किया गया. उनके ख़िलाफ़ हत्या के षड्यंत्र का आरोप साबित नहीं किया जा सका.

शर्मा ने दिल्ली की एक अदालत के आजीवन कारावास के फ़ैसले के विरुद्ध उच्च न्यायालय में अपील की थी. वह पिछले नौ वर्षों से तिहाड़ जेल में बंद थे.

आरके शर्मा एक समय प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्यरत थे और मार्च 2008 में उन्हें इस मामले में दोषी पाया गया था.

निचली अदालत ने कहा था कि आरके शर्मा ने प्रदीप शर्मा को शिवानी भटनागर की हत्या करने के लिए कहा था क्योंकि शिवानी ने आरके शर्मा के साथ अपने कथित संबंधों को सार्वजनिक करने की धमकी दी थी.

मामला

दिल्ली के अख़बार 'इंडियन एक्सप्रेस' में काम करने वाली पत्रकार शिवानी भटनागर की 23 जनवरी 1999 को उनके पूर्वी दिल्ली स्थित अपार्टमेंट में हत्या कर दी गई थी.

क़रीब नौ साल बाद अदालत ने 18 मार्च 2008 को फ़ैसला सुनाया.

उस समय जज राजेंद्र कुमार शास्त्री ने 100 पन्ने के फ़ैसले में कहा था कि भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी आरके शर्मा ने अन्य अभियुक्तों के साथ शिवानी भटनागर को मारने की साज़िश की थी.

अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि शिवानी भटनागर पहली बार आरके शर्मा से तब मिली थीं जब शर्मा प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल के कार्यालय में विशेषाधिकारी थे.

अदालत में सुनवाई के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार बाद में शिवानी भटनागर और आरके शर्मा के बीच प्रेम संबंध बन गए और उसी दौरान शर्मा ने शिवानी को कुछ गोपनीय दस्तावेज़ दिखाए जिनमें सेंट किट्स मामले से संबंधित भी कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज़ थे.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक़ आरके शर्मा ने शिवानी भटनागर से विवाह करने से इनकार कर दिया तो शिवानी भटनागर ने कथित तौर पर आरके शर्मा का भंडाफोड़ करने की धमकी दी. अदालत को बताया गया कि उसके बाद शर्मा ने शिवानी की हत्या करने का फ़ैसला कर लिया.

शिवानी भटनागर अपने मकान में अपने बेटे के साथ रहती थी जब उसकी हत्या की गई. आरोप थे कि हत्यारों ने बिजली के एक तार से शिवानी भटनागर का गला घोंट दिया और किचन में इस्तेमाल होने वाले चाकू से उस पर कम से कम दस वार किए.

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