तेलंगाना हड़ताल को एक महीना पूरा

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Image caption हड़ताल के दौरान बसों में तोड़फोड़ भी की गई

आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के लिए सरकारी कर्मचारियों और अध्यापकों की अनिश्चित काल की हड़ताल को एक महीना पूरा हो गया है.

लेकिन न तो केंद्र सरकार और न ही कांग्रेस आलाकमान की ओर से समस्या का कोई समाधान निकाले जाने का संकेत है और न ही हड़ताल के जल्द समाप्त होने के कोई आसार दिखाई दे रहे हैं.

उल्टी स्थिति बिगड़ती दिखाई दे रही है, क्योंकि आंदोलनकारी और प्रशासन रेल रोको आंदोलन के विषय पर टकराव की ओर बढ़ रहे हैं.

राज्य में कांग्रेस की सरकार को एक और तगड़ा झटका लगा जब तेलंगाना से कांग्रेस के लोकसभा सदस्यों ने शनिवार से शुरू हो रहे रेल रोको कार्यक्रम में हिस्सा लेने का फ़ैसला किया है.

कांग्रेस के आठ लोकसभा सदस्यों ने तेलंगाना की मांग पर कांग्रेस के आलाकमान की ख़ामोशी पर कड़ी नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा है कि वो तेलंगाना की आम जनता की आकांक्षाओं को प्रकट करने के लिए आंदोलन में खुल कर हिस्सा ले रहे हैं.

उन्होंने दिल्ली में लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार से मुलाक़ात की और मांग की कि उन्होंने गत जुलाई में जो त्यागपत्र दिया था, उसे तुरंत स्वीकार कर लिया जाए.

मुलाक़ात के बाद इन सांसदों में से एक राजगोपाल रेड्डी ने कहा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्हें ख़ुद अपनी पार्टी और सरकार के ख़िलाफ़ लड़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि कांग्रेस पर से तेलंगाना की जनता का विश्वास उठता जा रहा है.

एक और सांसद सुखिंदर रेड्डी ने कहा कि उनकी कोशिश असल में कांग्रेस को तेलंगाना में मिटने से बचाने की है. सांसदों ने कहा है कि वे शनिवार से अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों में रेल रोको कार्यक्रम में भाग लेंगे.

अनुरोध

उन्होंने अपने समर्थकों और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं से भी इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने का अनुरोध किया. इससे किरण कुमार रेड्डी सरकार के लिए समस्याएँ बढ़ गई हैं, क्योंकि वो तेलंगानावादी आंदोलनकारियों को धमका रही थी कि अगर उन्होंने रेल सेवाओं में बाधा डालने की कोशिश की, तो उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उन्हें गिरफ़्तार किया जाएगा.

अब अगर ख़ुद कांग्रेस के नेता इसमें हिस्सा लेते हैं, तो सरकार के लिए कोई बड़ी कार्रवाई करना मुश्किल हो जाएगा.

कांग्रेस सांसदों की इस घोषणा से तेलंगानावादियों में नया जोश आ गया है. तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति और तेलंगाना राष्ट्र समिति ने इसका स्वागत करते हुए तेलंगाना में कांग्रेसी विधायकों और मंत्रियों से कहा कि वो भी त्यागपत्र देकर आंदोलन में शामिल हो जाएँ.

संघर्ष समिति के संयोजक प्रोफ़ेसर कोदंडा राम ने तेलंगाना के ग्रामीण इलाक़ों के लोगों का आह्वान किया है कि वे लाखों की संख्या पर रेल पटरियों पर बैठ जाएं और एक भी रेल चलने न दें. उनका कहना था, "इस आंदोलन का उद्देश्य इस लड़ाई की गर्मी को दिल्ली तक पहुँचाना है."

इधर राज्य सरकार ने कर्मचारियों की हड़ताल को ख़त्म कराने के लिए उनके नेताओं के साथ बातचीत की, जो किसी नतीजे के बिना ही समाप्त हो गई.

इन नेताओं ने सरकार के सामने तीन बड़ी मांगें रखीं, जिनमें आवश्यक सेवाओं की बहाली का क़ानून वापस लेना, हड़ताल की मियाद के लिए वेतन अदा करना, कर्मचारियों के विरुद्ध दर्ज मामले वापस लेना और उनके एक नेता स्वामी गौड़ पर पुलिस के हमले की छानबीन कराना शामिल है.

सरकार ने कहा है कि वे इस पर विचार के बाद जवाब देगी. साथ ही कर्मचारियों के नेताओं ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनका असल लक्ष्य तेलंगाना राज्य प्राप्त करना है, इसलिए जब तक केंद्र सरकार उस मांग को पूरा नहीं करती उन की हड़ताल जारी रहेगी.

निशाना

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Image caption कोदंडा राम ने कांग्रेसी सांसदों का आभार जताया

इससे पहले रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म करवाने के लिए सरकार की कोशिश पूरी तरह सफल नहीं हो सकी.

हैदराबाद में कुछ बसें ज़रूर चल रही हैं, लेकिन तेलंगाना के दूसरे ज़िलों में कोई बस नहीं चल रही है. हैदराबाद में भी इन बसों को आंदोलनकारियों ने हमलों का निशाना बनाया.

नलगोंडा में ऐसी सात बसों को जला दिया गया. एक और घटना में पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी के राज्य अध्यक्ष और विधायक किशन रेड्डी को उस समय गिरफ़्तार कर लिया, जब वे आंदोलन में भाग लेने वाले बिजली विभाग के कर्मचारियों से समर्थन प्रकट करने के लिए उनके कार्यालय में जा रहे थे.

उन्हें पुलिस पकड़ कर नामपल्ली स्टेशन ले गई, जहाँ किशन रेड्डी धरने पर बैठ गए हैं. उनका और दूसरे नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार अलोकतांत्रिक तरीक़ों से तेलंगाना के आंदोलन को कुचलने की कोशिश कर रही है, जिसे सफल होने नहीं दिया जाएगा.

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