केबल ऑपरेटरों पर लगेगी नकेल

  • 13 अक्तूबर 2011
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Image caption अभी चैनल प्रसारक और उपभोक्ता दोनों केबल टीवी ऑपरेटर पर आश्रित रहते हैं

भारत में सैटेलाइट टीवी दर्शकों और प्रसारकों को फ़ायदा पहुंचाने वाले एक फ़ैसले के तहत केंद्र सरकार ने टीवी पर आने वाले कार्यक्रमों को डिजिटल स्वरुप में प्रसारित करने की अनुमति दे दी है.

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने गुरूवार को दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि सरकार ने इस बाबत एक अध्यादेश राष्ट्रपति के पास मंज़ूरी के लिए भेजा है.

वर्तमान में एनालॉग प्रसारण के चलते उपभोक्ता के पास अभी यह स्वतंत्रता नहीं रह जाती कि वो अपने मन से चैनलों का चुनाव कर सकें. ज़्यादातर मामलों में केबल ऑपरेटर 80-90 चैनल दिखाते हैं और उपभोक्ता से एक तय राशि लेते हैं.

डिजिटल हो जाने के बाद ना केवल प्रसारण की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि डिजिटल नेटवर्क पर 1000 तक चैनल उपलब्ध कराए जा सकेगें.

प्रसारक को लाभ

चैनल प्रसारण को डिजिटल स्वरुप में किए जाने से प्रसारकों को भी लाभ होगा. प्रसारकों को केबल ऑपरेटर को अपना चैनल दिखाने के लिए पैसे नहीं देने होंगे.

प्रसारकों का 20 फ़ीसदी ख़र्चा केवल अपने प्रसारण को आगे के चैनल नंबरों पर रखने और उन्हें सही स्वरुप में दर्शकों तक पहुंचाने में ख़र्च होता है.

इसके अलावा केबल ऑपरेटरों द्वारा दर्शकों तक प्रसारण पहुंचाने की एक सीमित क्षमता होती है इसके चलते सैटेलाइट चैनल प्रसारकों को इस बात के लिए होड़ लगानी पड़ती थी कि केबल ऑपरेटर उनका चैनल दिखाएँ.

राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद आगामी मार्च 31 तक देश में चार प्रमुख महानगरों में केबल ऑपरेटरों को एनालॉग प्रसारण बंद करना होगा. जिन शहरों में 10 लाख के ऊपर आबादी है उन शहरों में यह नियम 31 मार्च 2013 तक लागू होगा.

देश के पूरे शहरी इलाक़ों में यह नियम सितंबर 2013 तक लागू हो जाएगा और पूरे देश के हर घर में सितंबर 2014 तक डिजिटल प्रसारण पहुंचाने की योजना बनाई गई है.

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