लोकायुक्त रिपोर्ट पर कर्नाटक सरकार ने उठाए 'सवाल'

  • 14 अक्तूबर 2011
कर्नाटक विधानसभा
Image caption कर्नाटक राज्य में पहली बार बीजेपी की सरकार सत्ता में है.

कर्नाटक की सरकार ने अवैध खनन पर लोकायुक्त की रिपोर्ट पर कई सवाल खड़े करते हुए उसे वापस भेज दिया है और संस्था से स्पष्टीकरण मांगा है.

पूर्व लोकायुक्त संतोष हेगड़े की देख-रेख में तैयार की गई इस रिपोर्ट में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा पर सीधा आरोप लगाया गया था जिसके बाद उन्हें त्यागपत्र देने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

गुरूवार को बैंगलौर में मंत्रीमंडल की हुई एक बैठक के बाद सरकार ने लोकायुक्त से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि क्या किसी विधायक या मंत्री के ख़िलाफ़ बिना किसी शिकायत के दर्ज हुए कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है?

राज्य के क़ानून मंत्री सुरेश कुमार ने कहा है, "इस मामले में आरोप था जिसके आधार पर एक जांच की गई. सच जानना ज़रूरी है. हम महज़ कुछ स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं और इसलिए हमने रिपोर्ट वापस भेजी है."

ये भी पुछा गया है कि क्या लोकायुक्त क़ानून के भीतर "शासकीय कर्मचारी" में मंत्री भी शामिल हैं?

साथ ही संस्था ने जिन लोगों पर आरोप लगाया है उनसे रिपोर्ट तैयार करने के पहले उनका पक्ष नहीं लिया?

हालांकि कर्नाटक हुकुमत के इस ताज़ा क़दम को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और दूसरे नेताओं को बचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि राज्य में फ़िलहाल कोई लोकायुक्त नहीं है. उप-लोकायुक्त ने भी पद से इस्तीफ़ा दे दिया है और जुलाई के अंत में सौंपी गई रिपोर्ट पर कार्रवाई करने की तीन माह की अवधि समाप्त होने वाली है.

अपना मुख्यमंत्री

केंद्र की मनमोहन सिहं सरकार के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार पर मुहिम चला रही भारतीय जनता पार्टी के लिए लोकायुक्त की रिपोर्ट ने बड़ी विकट स्थिति पैदा कर दी थी, ख़ासतौर पर इसलिए भी क्योंकि सीधे आरोप लगने के बावजूद भी बीएस येदियुरप्पा ख़ुद से पद छोड़ने को तैयार नहीं थे.

बाद में पार्टी के केंद्रीय नेताओं के भारी दबाव में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से त्याग दिया था.

मगर कहा जाता है कि येदियुरप्पा ने केंद्रीय नेतृत्व को इस बात के लिए मजबूर किया था कि वो उनके उम्मीदवार को मुख्यमंत्री बनाए.

सदानंद गौड़ा के नेतृ्त्व वाली सरकार ने जिन तीन तकनीकी मुद्दों पर लोकायुक्त से सफ़ाई मांगी है वो लगभग वही हैं जिन्हें अगस्त में बीएस येदियुरप्पा ने कर्नाटक हाई कोर्ट में उठाया था.

कैबिनट ने रिपोर्ट के उस हिस्से पर चुप्पी साध रखी है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री और दूसरे मंत्रियों के ख़िलाफ़ कारवाई की सिफारिश की है.

हालांकि सरकार ने कहा है कि वो 700 से अधिक सरकारी कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कारवाई करेगी.

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