रामानुजन के लेख़ पर विवाद

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Image caption रामायण पर प्रख्यात विद्वान रामानुजन के लेख़ को दिल्ली विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम से हटाने का निर्णय लिया गया है

प्रख्यात विद्वान रामानुजन के लेख़ को दिल्ली विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम से हटाने के निर्णय के बाद इतिहास विभाग और डीयू एकेडेमिक काउंसिल आमने-सामने आ गए है.

दिल्ली विश्वविद्यालय में बीए-इतिहास में पढ़ाए जाने वाले इस लेख़ को पाठ्यक्रम से हटाए जाने के निर्णय से इतिहास विभाग और इतिहासकार नाराज़ है. हाल ही में विभाग ने एक आंतरिक बैठक में फ़ैसला किया है कि वो एकेडेमिक काउंसिल से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने को कहेगा.

इतिहास विभाग के प्रमुख आरसी ठकरान का कहना है की चूंकि एकेडेमिक काउंसिल का निर्णय ही आख़िरी होता है इसलिए विभाग अपनी ओर से काउंसिल को इस लेख़ की ज़रूरत के बारे में समझाएगा.

विभाग को विशेषज्ञों और इतिहास से जुड़े अन्य शिक्षकों का भी समर्थन मिला है. दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर बीपी साहू ने कहा है कि जेएनयू, जामिया मिलिया समेत अन्य कई संस्थानों के शिक्षक रामानुजन के लेख़ को पाठ्यक्रम में बनाए रखने के पक्ष में है.

समस्या

जाने-माने भाषाविद् एके रामानुजन के लेख़ 'Three Hundred Ramayanas: Five examples and three thoughts on translation' में रामायण की विविधता और अनुवादों पर बात की गई है.

लेख़ को साल 2006 में दिल्ली विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में जोड़ा गया था. बाद में इस पर हिन्दूवादी दलों की ओर से विवाद किए जाने के कारण लेख़ पर विचार के लिए चार विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई थी.

समिति के चार में से तीन विशेषज्ञ इस लेख़ को पाठ्यक्रम में रखे जाने के पक्ष में थे जबकि एक विशेषज्ञ की राय थी कि इस लेख़ को हटा दिया जाना चाहिए क्योंकि उनके मुताबिक शिक्षक इस लेख़ की पृष्ठभूमि शायद ठीक से समझा नही पाएंगे.

दिल्ली विश्वविद्यालय की एकेडेमिक काउंसिल ने 9 अक्तूबर को हुए बैठक में ध्वनि मत के बाद लेख़ को पाठ्यक्रम से हटाने का निर्णय ले लिया. काउंसिल के 120 उपस्थित सदस्यों में से नौ लोगो ने लेख़ को पाठ्यक्रम में रखे जाने के पक्ष में लिखित मत दिए जबकि बाकी सभी ने लेख़ को हटाए जानें के पक्ष मे वोट दिया.

वोटिंग में रामानुजन के लेख़ के पक्ष में मत देने वाली एकेडेमिक काउंसिल की सदस्या रेनू बाला ने कहा कि लेख़ को पाठ्यक्रम से नही हटाया जाना चाहिए और विद्यार्थियो को इतिहास के बारे मे हर दृष्टिकोण की जानकारी दी जानी चाहिए.

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