तेलंगाना में कोयला कर्मचारियों की हड़ताल टूटी

  • 18 अक्तूबर 2011
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Image caption सरकारी कर्मचारी अभी भी हड़ताल जारी रखे हुए हैं

आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के लिए जारी आंदोलन को मंगलवार को एक और धक्का लगा जब सिंगरेनी कॉलरीज़ कंपनी की कोयला खदानों के मज़दूर 35 दिन की हड़ताल के बाद काम पर लौट आए.

इससे पहले ट्रांसपोर्ट कंपनी और निजी स्कूलों ने अपनी हड़ताल ख़त्म कर दी थी.

हालांकि सरकारी कर्मचारियों, वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल अभी भी जारी है.

इस बीच तेलंगाना संघर्ष समिति ने अपनी रणनीति बदलते हुए इसे कांग्रेस के विरोध में केंद्रित करने का फ़ैसला किया है.

बिजली संकट हल होने की संभावना

लगभग 70 हज़ार खदान मज़दूर गत 13 सितंबर से तेलंगाना राज्य की मांग के समर्थन में हड़ताल पर थे. लेकिन उनकी यूनियनों ने सरकार से बातचीत के बाद हड़ताल वापस लेने का फ़ैसला किया.

कंपनी ने इन कर्मचारियों में से हर एक को दीवाली के लिए 25 हज़ार रुपये एडवांस और हड़ताल की अवधि को उनकी छुट्टियों में शामिल करने पर भी सहमति बन गई है. इस हड़ताल के समाप्त हो जाने पर राज्य सरकार ने राहत की सांस ली है क्योंकि कोयले का उत्पादन बंद हो जाने से थर्मल बिजली घरों में बिजली का उत्पादन रुक गया था और राज्य में बिजली का गंभीर संकट पैदा हो जाने से सरकार को बिजली की कटौती करनी पड़ी थी.

अब अगले कुछ दिनों में बिजली की आपूर्ति सामान्य हो जाने की उम्मीद है. लेकिन तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा है कि सिंगरेनी की यूनियनों ने उससे सलाह मशविरे के बाद ही अपने आंदोलन को अस्थाई रूप से ख़त्म करने का फ़ैसला किया है लेकिन जब भी ज़रुरत पड़ेगी वो दोबारा हड़ताल शुरू कर देंगे. इस से पहले रोड ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन के करमचारियों ने भी अपनी हड़ताल ख़त्म कर दी थी जिसके बाद तेलंगाना में बसें चलनी शुरू हो गई हैं.

इस के अलावा निजी स्कूलों ने भी अपनी हड़ताल समाप्त कर दी है.

सरकारी कर्मचारी अभी भी हड़ताल पर

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Image caption तेलंगाना में बसों की हड़ताल पिछले दिनों ख़त्म हुई है

लेकिन सरकारी कर्मचारी अभी भी हड़ताल पर हैं और उनका कहना है कि जब तक तेलंगाना राज्य की स्थापना का विधेयक केंद्र सरकार संसद में नहीं पेश कर देती, वो हड़ताल जारी रखेंगे. इस के साथ ही वकीलों और न्यायिक विभाग के कर्मचारियों ने अपना आंदोलन तेज़ कर दिया है.

उन्होंने मंगलवार को हाईकोर्ट के भीतर प्रदर्शन किया और वहां से एक जुलूस निकलने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया.

इधर शराब की दुकानों की संगठन ने भी बुधवार को तेलंगाना में अपनी दुकानें बंद रखने का फ़ैसला किया है.

उनका कहना है कि तेलंगाना क्षेत्र से सरकार को होने वाली आय में कमी लाने के लिए ऐसा फ़ैसला किया गया है.

नई रणनीति

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक प्रोफ़ेसर कोदंडा राम ने कहा है कि इस आंदोलन की रणनीति में कुछ परिवर्तन किया जा रहा है लेकिन आंदोलन इसी तरह चलता रहेगा.

उन्होंने ने कहा की नई रणनीति के अंतर्गत कांग्रेस पार्टी को निशाना बनाया जाएगा.

उन्होंने कहा कि उन का नारा अब 'कांग्रेस मिटाओ-तेलंगाना बनाओ' होगा.

इस का करण बताते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के तेलंगाना नेता आंध्र वालों के हाथों में कठपुतली बने हुए हैं और वही तेलंगाना राज्य की स्थापना के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट हैं.

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