'तेलंगाना संकट के लिए सोनिया-मनमोहन ज़िम्मेदार'

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Image caption आडवाणी ने केंद्र सरकार की जम कर आलोचना की

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने तेलंगाना की जनता को विश्वास दिलाया है कि अगर केंद्र सरकार ने अलग राज्य की उनकी मांग स्वीकार नहीं की, तो भाजपा के नेतृत्व वाला राजग सत्ता में आते ही उनकी इस मांग को पूरा करेगा.

बुधवार को हैदराबाद में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए आडवाणी ने कहा कि तेलंगाना की मौजूदा स्थिति के लिए कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गाँधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ज़िम्मेदार हैं, क्योंकि 37 दिनों से चल रही हड़ताल के बावजूद केंद्र ने इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया.

आडवाणी की जन चेतना यात्रा बुधवार शाम ही हैदराबाद पहुँची, जहाँ उसका ज़बरदस्त स्वागत किया गया.

मंगलवार की शाम से यात्रा के तेलंगाना में प्रवेश करने के बाद से आडवाणी का ज़्यादा ज़ोर तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर ही रहा. उन्होंने कहा कि उनकी ये यात्रा असल में भ्रष्टाचार और काले धन के विरुद्ध है, लेकिन उसका एक और उद्देश्य तेलंगाना राज्य की स्थापना भी है.

उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि तेलंगाना राज्य के लिए अब तक 600 से भी ज़्यादा लोगों ने आत्महत्या की है, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है.

विश्वासघात

आडवाणी का कहना था, "तेलंगाना में मेरी यात्रा का जो स्वागत हुआ है, वो अभूतपूर्व है और इसका एक करण यह भी है कि लोगों में ग़ुस्सा और आक्रोश है."

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तेलंगाना राज्य का वादा करने के बाद लोगों के साथ विश्वासघात किया है.

उन्होंने कहा कि अगर अब भी सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह कोई फ़ैसला कर लें, तो तेलंगाना एक सच्चाई बन सकती है. अगर संसद में यह प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो एक जनवरी 2012 से पहले ही तेलंगाना एक सच्चाई बन जाएगा.

घोटालों और भ्रष्टाचार के मुद्दे का उल्लेख करते हुए आडवाणी ने कहा कि यूपीए सरकार के दौर में घोटालों की एक बाढ़ आ गई है और इससे पूरे विश्व में देश की बदनामी हुई है.

उन्होंने कहा कि 21वीं शताब्दी में भारत के एक महाशक्ति बनने का सपना उसी समय पूरा हो सकता है, जब सत्ता में जो लोग हैं, वे ईमानदार हों.

उन्होंने कहा कि देश की 25 लाख करोड़ की संपत्ति विदेशी बैंकों में रखी है, उसे वापस लाकर ग्रामीण इलाक़ों पर ख़र्च करना चाहिए.

आडवाणी ने कहा, "अगर ऐसा हुआ तो देश में एक भी ऐसा गाँव नहीं रहेगा, जहाँ पीने का पानी और बिजली न हो."

दूसरी ओर तेलंगाना राज्य के समर्थन में आडवाणी के लगातार बयानों ने आंध्र क्षेत्र के लोगों में नाराज़गी पैदा कर दी है और उस क्षेत्र में जगह-जगह आडवाणी और भाजपा के विरुद्ध प्रदर्शन हुए हैं. विशाखापत्तनम में प्रदर्शनकारियों ने आडवाणी का पुतला भी जलाया.

विरोध

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Image caption आडवाणी ने तेलंगाना का समर्थन किया

आंध्र प्रदेश के विभाजन के ख़िलाफ़ आंदोलन चलने वाले आंध्र प्रदेश छात्र संघर्ष समिति के एक नेता किशोर ने कहा कि अगर आडवाणी की यात्रा आंध्र में आती है, तो उसे लोगों के विरोध का सामना करना पड़ेगा.

आंध्र के नेताओं का सवाल है कि जब आडवाणी गृह मंत्री थे, तो उन्होंने तेलंगाना राज्य का विरोध किया था, फिर अब वे उसका समर्थन कैसे कर सकते हैं.

आडवाणी की आलोचना करने वालों में आंध्र से संबंध रखने वाले एक कांग्रेसी मंत्री शैलजानाथ और तेलुगू देसम के नेता यानामाला भी शामिल हैं.

लेकिन ऐसे संकेत भी हैं कि तेलंगाना के समर्थन के करण भाजपा और तेलंगाना राष्ट्र समिति एक दूसरे के निकट आ रहे हैं. जब आडवाणी की यात्रा मेदक ज़िले में पहुँची, तो उसका स्वागत करने वालों में टीआरएस की सांसद विजया शांति भी शामिल थी.

विजया शांति पहले भाजपा में ही थीं, लेकिन बाद में वे टीआरएस में शामिल हो गईं और 2009 में लोक सभा के लिए चुनी गईं.उन्होंने कहा कि अगर टीआरएस और भाजपा मिलकर लड़ते हैं, तो तेलंगाना राज्य हासिल करना और भी आसन हो जाएगा.

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