कैंप में दृष्टि खोने के मामले पर मानवाधिकार आयोग का नोटिस

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के नोटिस के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने दुर्ग ज़िले में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद दृष्टि खो चुके 45 ग्रामीणों के मामले में जांच और तेज़ कर दी है.

ये जांच राज्य का चिकित्सा विभाग कर रहा है. सितंबर महीने की 21 से 30 तारीख़ तक दुर्ग के बालोद में चले मोतियाबिंद के कैंप में 334 मरीजों नें इलाज हुआ था.

इनमे से 45 ग्रामीण ऐसे थे जिनका ऑपरेशन तो हुआ मगर उसके बाद उन्हें संक्रमण हो गया जिसकी वजह से उनकी आंखों की रोशनी जाती रही.

इस बीच ख़बर आ रही है कि इनमे से तीन मरीजों नें संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया.

लेकिन गुरुवार को राज्य के चिकित्सा विभाग नें एक विज्ञप्ति जारी कर तीन मौतों की बात से इनकार किया है. विज्ञप्ति में कहा गया है कि, "मौतें हुईं लेकिन आँखों के संक्रमण के कारण नहीं."

विभाग का कहना है कि कैंप में तीन अनुभवी सरकारी डॉक्टरों की टीम नें मोतियाबिंद के ऑपरेशन किये थे. वैसे इस मामले में अब तक राज्य सरकार ने छह कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है.

विभाग की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि जिन औजारों से ऑपरेशन किए गए थे उनमे 'फंगस' या फफूंद लगा हुआ था. यही कारण है कि संक्रमण इतना तेज़ी से फैला.

कांग्रेस ने इस्तीफ़े की मांग की

मगर राज्य में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है. कांग्रेस का कहना है कि इस कैंप में शामिल सभी लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नन्द कुमार पटेल नें इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री और स्वस्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल के इस्तीफे की मांग की है.

उधर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नें भी मामले पर पहल करते हुए छत्तीसगढ़ की सरकार को नोटिस भेजा है.

आयोग नें राज्य के मुख्य सचिव से मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है.

साथ ही आयोग ने सरकार को कहा है कि वह पीड़ित मरीजों के समुचित इलाज की व्यवस्था भी सुनिश्चित करे.

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