किन-किन पर हैं भ्रष्टाचार के आरोप

ए राजा (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption ए राजा की गिरफ़्तारी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में हुई है जिसके बारे में दो हज़ार से लेकर एक लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए के घोटाले का अनुमान लगाया जाता है.

भारत में उन नेताओं की एक लंबी फ़ेहरिस्त है जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और पिछले दिनों में उन्हें इसका ख़ामियाजा भी भुगतना पड़ा है.

मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री तक और सांसद से लेकर ग्राम प्रधान तक कई लोग इस समय जेल में भी हैं.

शुरुआत आज की तारीख़ में सबसे चर्चित घोटाले 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुए घोटाले से कर सकते हैं.

इस घोटाले में अब तक दो दर्जन से ज्यादा लोग जेल में बंद है. इनमें सबसे प्रमुख नाम हैं पूर्व केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके सांसद कनिमोड़ी का.

आज़ाद भारत की इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि एक मौजूदा केंद्रीय मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में जेल गया हो. ए राजा पिछले सात महीने से जेल में हैं.

उनकी पार्टी की सहयोगी और सांसद कनिमोड़ी भी इसे मामले में पिछले कुछ महीनों से जेल में हैं. इस कथित घोटाले में दूरसंचार मंत्रालय और रिलायंस कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारी भी जेल में हैं.

सीधे तौर पर इस मामले में तो नहीं लेकिन दूरसंचार मंत्री रहते हुए एक विशेष कंपनी पर दबाव डालने और एक विशेष कंपनी को फ़ायदा पहुंचाने के आरोप में तत्कालीन केंद्रीय कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन को इस्तीफ़ा देना पड़ा.

स्पेक्ट्रम आबंटन घोटाले के अलावा दूसरा बड़ा घोटाला 2010 में दिल्ली में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में हुआ. इस मामले में भी कई लोग फ़िलहाल जेल में बंद हैं और मामला अदालत में हैं.

इस मामले में जेल जाने वालों में सबसे प्रमुख नाम इसके आयोजन समिति के तत्कालीन अध्यक्ष और कांग्रेसी सांसद सुरेश कलमाड़ी का है.

वो पिछले कई महीनों से जेल में हैं.

राष्ट्रीय स्तर पर हुए इन दो बड़े घोटालों के अलावा एक और मामला जिसने राष्ट्रीय सुर्ख़ी की जगह ली है, वो है कैश फ़ॉर वोट मामला. इस मामले में आरोप है कि 2008 में यूपीए सरकार से वाम दलों के समर्थन वापसी की घोषणा के बाद सरकार अल्पमत में आ गई थी और राष्ट्रपति ने सरकार से संसद में अपना बहुमत साबित करने के लिए कहा था.

जुलाई 2008 में विश्वास मत के दौरान भाजपा के तीन सांसदों ने संसद में नोटों की गड्डी उछालकर ये दावा किया था कि उन्हें ये पैसे कांग्रेस ने उनके पक्ष में वोट डालने के लिए दिए हैं.

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Image caption येदियुरप्पा की गिरफ़्तारी ऐसे समय में हुई है जब उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता अडवाणी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ रथ यात्रा कर रहें हैं.

इस मामले में अदालत के सख़्त रवैये के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन साल के बाद थोड़ी तेज़ी दिखाई और फ़िलहाल इस मामले में भाजपा के दो सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के निकट सहयोगी रहे सुधींद्र कुलकर्णी भी जेल में हैं.

इन सबके अलावा इस मामले में जेल जाने वालों में सबसे प्रमुख नाम है समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह का. अमर सिंह पर आरोप है कि इस पूरे मामलें के पीछे उन्हीं का हाथ है.

राज्यों के घोटाले

राष्ट्रीय स्तर से हटकर राज्य के स्तर पर जाएं तो यहां भी भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाने वाले या अपने पद से इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर होने वालों की एक लंबी सूची है.

लेकिन उनमें शायद सबसे प्रमुख मामला कर्नाटक में अवैध खनन और ज़मीन आवंटन का है.

अवैध खनन के मामले में लोकायुक्त की रिपोर्ट आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को इस्तीफ़ा देना पड़ा था. उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी रेड्डी बंधुओं को भी इस्तीफ़ा देना पड़ा था और जनार्दन रेड्डी और श्रीनिवास रेड्डी तो अब इसी मामले में जेल में हैं.

येदियुरप्पा भी फ़िलहाल जेल में हैं लेकिन वो खनन घोटाले के मामले में नहीं बल्कि ज़मीन आवंटन घोटाले के एक दूसरे मामले में गिरफ्तार किए गए हैं.

इसी तरह उत्तराखंड में भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद पार्टी ने ख़ुद ही उनसे इस्तीफ़ा देने को कह दिया था.

सबसे ताज़ा मामला तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता से जुड़ा. 1996 में दायर भ्रष्टाचार के एक मुक़दमे में जयललिता को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर

गुरूवार( 20 अक्तूबर, 2011) को बंगलौर की एक अदालत के सामने पेश होना पड़ा.

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