अलगाववादी नेता गिलानी के रूख़ में बदलाव

सैयद अली शाह गिलानी (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट AP
Image caption गिलानी का ये बयान बातचीत के लिए रास्ता हमवार कर सकता है.

भारत प्रशासित कश्मीर के प्रमुख अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कहा है कि भारत से अगर कोई सकारात्मक बातचीत का पैग़ाम आता है तो वो अपने साथियों के साथ इस पर बातचीत करेंगे.

गुरूवार को भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में एक प्रेस वार्ता के दौरान सैयद अली शाह गिलानी ने ये बातें कहीं.

उनका कहना था कि अगर भारत सरकार इस मामले में कोई पहल करती है तो वो इसे हुर्रियत कॉंफ़्रेंस(गिलानी गुट) के मजलिस-ए-शूरा के सामने रखेंगे और फिर उस पर विचार विमर्श करेंगे.

उन्होंने ये भी कहा कि ना केवल हुर्रियत के साथियों के साथ बल्कि इससे बाहर पूरे राज्य में उनके नज़रिए से तालमेल रखने वालों के साथ भी वो विचार विमर्श करेंगे.

गुरूवार को कुछ मीडिया में ख़बरें छपी हैं कि भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी से बातचीत के बारे में सोच रहें हैं.

पत्रकारों ने उनसे जब इस ख़बर के बारे में पूछा तो उनका कहना था, ''कश्मीर विवाद का मुख्य मुद्दा भारतीय सेना का कश्मीर पर जबरन क़ब्ज़ा है, और इसको हल किए बिना कश्मीर समस्या का समाधान नहीं निकल सकता.''

गिलानी के इस मौजूदा बयान को उनके रूख़ में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इससे पहले भारत सरकार के किसी भी पहल को वो सिरे से ही ख़ारिज कर देते थे.

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने ये भी कहा कि भारत और राज्य की मौजूदा उमर सरकार जानबूझकर राज्य में ग़ैर-कश्मीरियों को बसाने का काम कर रही है.

उनके मुताबिक़ इस समय पूरे जम्मु-कश्मीर में चार लाख 98 हज़ार ग़ैर-कश्मीरी रह रहें हैं. उन्होंने कहा कि ये भारत सरकार की एक साज़िश है और राज्य सरकार भी इसमें पूरी तरह शामिल है.

गिलानी के मुताबिक़ सरकार ऐसा इसलिए कर रहीं है क्योंकि वो जम्मु-कश्मीर में जनसांख्यिकी परिवर्तन करना चाहती है.

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