भारत दौरे पर पहुंचे बाबूराम भट्टाराई

  • 20 अक्तूबर 2011
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Image caption बाबूराम भट्टाराई ने अपनी शिक्षा दीक्षा भरता में की है और कई राजनीतिक पार्टियों में उनके अच्छे दोस्त भी हैं.

नेपाल के प्रधानमंत्री बाबूराम भट्टाराई चार दिनों की भारत यात्रा पर गुरूवार को राजधानी दिल्ली पहुंचे हैं.

माना जा रहा है कि उनकी यात्रा का मक़सद दोनों पड़ोसी देशों के बीच पारंपरिक संबंधों को आगे बढ़ाना और पिछले कुछ वर्षों से इन सम्बंधों में आई खटास को दूर करना है.

अपनी तीन दिनों की यात्रा के दौरान बाबूराम भट्टाराई प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, वित्त मंत्री प्रणब मुख़र्जी, गृह मंत्री पी चिदंबरम और रक्षा मंत्री एके एंटनी से मुलाक़ात करेंगे.

हालांकि राजनीतिक हलकों में इस यात्रा को बेहद अहम बताया जा रहा है, लेकिन उनकी यात्रा शुरू होने से पहले ही बाबूराम भट्टाराई की सत्ताधारी माओवादी पार्टी कह चुकी है कि इस 'सदभावना' यात्रा के दौरान सिर्फ आर्थिक मुद्दों पर ही बातचीत होने की संभावना है.

मंगलवार को नेपाल की माओवादी पार्टी के सचिव चन्द्र प्रकाश गुजराल ने कहा था कि इस यात्रा में विवादित मुद्दों पर बातचीत नहीं होने की प्रबल संभावना है.

रिश्ते कितने अहम ?

भारत और नेपाल के रिश्ते कभी भी समानता के नहीं रहे हैं.

शुरुआत से ही नेपाल पर भारत के राजनीतिक परिदृश्य की छाप रही है और चाहे व्यापार हो या इंधन मुहैया कराने का मामला, भारत हमेशा से ही नेपाल के बड़े भाई जैसा रहा है.

बाबूराम भट्टाराई की यात्रा के दौरान भी उनके भारत से आर्थिक सहयोग की मांग की उम्मीद की जा रही है.

इस मदद से नेपाल की मंशा सड़क मार्गों को बेहतर करना और स्वास्थ्य सेवाओं में विस्तार लाना जैसी चीज़ें शामिल हैं.

नेपाल के प्रधानमंत्री ने तराई बेल्ट के क्षेत्रों को राजधानी के संपर्क मार्गों से जोड़ने के लिए भारत सरकार से आसान ऋण का भी प्रस्ताव रखा हुआ है.

वैसे नेपाल के प्रधानमंत्री ने इस ओर भी इशारा किया है कि अपनी यात्रा के दौरान वे नागरिक समाज के व्यक्तियों, मीडिया और कॉरपोरेट जगत की हस्तियों से भी मुलाक़ात रखने की मंशा रखते हैं.

लेकिन इस यात्रा के दौरान गौ़र करने वाली बात यही रहेगी कि क्या द्विपक्षीय वार्ता में प्रत्यर्पण और भारत-नेपाल सीमा पर ज्यादा सुरक्षा जैसे विवादित मसलों पर कुछ ठोस फैसले हो पाते हैं की नहीं.

ज़ाहिर है नेपाल के नए प्रधानमंत्री ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को ही चुना है ये अपने आप में एक ठोस संदेश है.

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