तीन गाँवों का अधिग्रहण रद्द

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Image caption किसानों का कहना है कि प्रशासन ने उनसे सस्ते दाम में ज़मीन खरीदकर महंगे दामों पर कंपनियों को बेच दी.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा भूमि अधिग्रहण मामले में फ़ैसला सुनाते हुए तीन गाँवों के अधिग्रहण को रद्द कर दिया है, साथ ही मामले की जाँच के भी आदेश दिए हैं.

हाई कोर्ट ने 63 गाँवों की सुनवाई करते हुए शाहबेरी, असदुल्लापुर और देवला के अधिग्रहण को रद्द किया है और बाक़ी के बचे गाँवों के किसानों को ज़मीनों के बढ़े हुए दामों के कारण 64 प्रतिशत ज़्यादा हर्ज़ाना देने को कहा है.

साथ ही किसानों को 10 प्रतिशत ज़मीन उस क्षेत्र में भी दिए जाने की बात अदालत ने कही है जो विकसित है.

इलाहाबाद से स्थानीय पत्रकार ऋषि मालवीय बताते हैं कि अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वो प्रधान सचिव के स्तर के एक अधिकारी को नियुक्त करे जो विकास कार्यों की जाँच करे, और ये भी देखे की किस तरह मास्टर प्लान में बदलाव किए गए, किस तरह ज़मीन बिल्डरों को दी गई.

अदालत ने इन सभी मुद्दों पर रिपोर्ट तलब की है.

जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसयू ख़ान और जस्टिस वीके शुक्ला की बेंच के इस फ़ैसले के कई मतलब निकाले जा रहे हैं, हालाँकि कुछ किसानों ने इससे नाख़ुशी भी जताई है.

उनका कहना है कि उन्होंने मुआवज़ा बढ़ाने की बात नहीं की थी, और वो तो अधिग्रहण ही रद्द करवाना चाहते थे.

किसानों का कहना रहा है कि उस वर्ष जब उनकी ज़मीन अधिग्रहित की गई थी तब उनसे कहा गया था कि विकसित किए जाने के बाद कुछ ज़मीन उन्हें लौटा दी जाएगी लेकिन अब तक ऐसा नहीं किया गया है.

इलाके में मौजूद बीबीसी संवाददाता पारुल अग्रवाल का कहना है कि जहाँ देवला जैसे गाँव में जिसका अधिग्रहण अदालत ने रद्द कर दिया है, वहाँ लोग खुशियाँ मना रहे हैं, बाकी गाँव वालों में से कई अदालत के फ़ैसले से ख़ुश नहीं हैं.

उन्होंने इस बारे में 25 तारीख को महापंचायत बुलाने की बात कही है जिसमें 50 गाँवों के लोग शामिल होंगे.

साथ ही उन्होंने आंदोलन करने की बात भी कही है.

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