महाराष्ट्र में लड़कियों को नए नाम दिए गए

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Image caption ये घटना भारत में महिलाओं की स्थिति के साथ-साथ समाज की बदलती मांसिकता को भी दर्शाती है.

भारत के पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र में एक अनोखी घटना में लगभग दो सौ लड़कियों के नाम बदलकर उनके नए नाम रखे गए हैं.

उनके पुराने नाम 'नकुशा' थे. नकुशा का शाब्दिक अर्थ होता है अनचाही यानि जिसे 'अपशगुनी' मानते हैं.

अब उन्हें ऐशवर्य नाम दिए गए है जिसका अर्थ होता है लक्ष्मी या धन-दौलत.

दर असल ये पूरा मामला भारत में महिलाओं की स्थिति के बारे में है.

भारत में लड़कियों की पैदाइश पर कोई ख़ास ख़ुशी नहीं मनाई जाती है, ख़ासकर भारत के ग्रामीण इलाक़ों में जहां बडी़ संख्या में ग़रीब लोग रहते हैं.

उन इलाक़ों में लड़की के जन्म को परिवार पर बोझ समझा जाता है क्योंकि उन लड़कियों की शादी के लिए उन्हें ढेर सारा दहेज देना होता है.

महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाक़ो में वे माता-पिता जो पुत्र की उम्मीद लगाए हुए थे और उनके घर में पुत्री ने जन्म ले लिया हो , वे अपनी पुत्री को 'नकुशा' कहते थे.

महाराष्ट्र के सतारा ज़िले में शानिवार को एक ख़ास कार्यक्रम के दौरान ऐसी ही 266 लड़कियों को नकुशा कहने के बजाए उनके नए नाम रखे गए.

इनमें शिशु से लेकर 16 साल तक की लड़कियां शामिल थीं.

सतारा के ज़िलाधिकारी एन रामास्वामी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को इसकी जानकारी दी.

रामास्वामी के अनुसार ये पूरा कार्यक्रम ज़िला परिषद ने आयोजित किया था.

रामास्वामी ने इस बारे में और जानकारी देते हुए कहा, ''ज़िला परिषद के अधिकारियों ने पूरे ज़िला के सर्वेक्षण के बाद 266 'नकुशा' लड़कियों की पहचान की थी और उनके माता-पिता से बातचीत के बाद उनके नाम बदलने का फ़ैसला किया. ग्रामीण इलाक़ो में लड़कियों के प्रति लोगों की मांसिकता को बदलने के लिए ये एक छोटा सा क़दम है.''

इस क़दम का स्वागत करते हुए स्थानीय सरकार ने कहा है कि लड़कियों का नाम बदला जाना समाज में लड़कियों के प्रति बदलते नज़रिए का प्रतीक है.

इस बारे में राज्य में सत्ताधारी राष्ट्रवादी क़ॉग्रेस पार्टी के एमएलसी विनायत मेटे ने कहा कि नकुशा शब्द महिलाओं के प्रति भेद-भाव को दर्शाता है.

उनके अनुसार, ''ये समाज की पुरुष प्रधान मांसिकता और पुत्री के जन्म पर माता-पिता की नाराज़गी को दर्शाता है.''

सरकार का भी मानना है कि समाज में लड़कियों के हितों की अनदेखी की जाती है और उनके साथ अच्छा बर्ताव नही किया जाता है.

पुत्र की चाहत के कारण पूरे भारत में गर्भपात और कन्या भ्रुण हत्या की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है.

भारत में शहरी और ग्रामीण दोनो इलाक़ो में हर साल पैदा होने वाली लड़कियों की तादाद लड़कों के मुक़ाबले में लगातार कम होती जा रही है.

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