तेलंगाना: कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म

  • 25 अक्तूबर 2011
सरकारी कर्मचारी (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल के ख़त्म होने से लोगों को काफ़ी राहत मिलेगी.

आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र में एक अलग राज्य के लिए पिछले 42 दिनों से चली आ रही सरकारी कर्मचारियों की आम हडताल सोमवार को समाप्त हो गई.

तेलंगाना कर्मचारियों की संयुक्त संघर्ष समिति के नेताओं और राज्य के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी के बीच सोमवार देर शाम तक हुई बात चीत के बाद एक समझौता हो गया जिसके बाद कर्मचारियों के नेताओं ने हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की.

ये कर्मचारी तेलंगाना राज्य की मांग के समर्थन में गत 13 सितंबर को हड़ताल पर चले गए थे.

उनके साथ ही रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन(आरटीसी) और सिंगरेनी की कोएले की खदानों के मज़दूर भी हड़ताल में शामिल हो गए थे जिससे पूरे तेलंगाना में न केवल प्रशासन ठप हो कर रह गया था, स्कूल कालेज सब बंद हो गए थे बल्कि बिजली की घोर समस्या भी खड़ी हो गई थी.

हालाँकि अध्यापक, आरटीसी और सिंगरेनी के खदान मज़दूर पहले ही अपनी हड़ताल ख़त्म कर के काम पर लौट गए हैं लेकिन सरकारी कर्मचारियों की यूनियनों ने उस समय तक हड़ताल जारी रखने का फ़ैसला किया था जब तक की केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य की स्थापना की घोषणा नहीं कर देती.

लेकिन एक ओर केंद्र और राज्य सरकारों के कड़े रुख़ और दूसरी तरफ़ आम लोगों की बढ़ती हुई मुश्किलों के कारण पड़ने वाले दबाव से मजबूर होकर कर्मचारियों के नेताओं ने सरकार से बातचीत शुरू की.

केंद्रीय स्वास्थ मंत्री और कॉग्रेस के प्रभारी ग़ुलाम नबी आज़ाद ने भी कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की थी और कहा था कि एक ऐसे समय जब की दीपावाली और बक़रईद का त्यौहार क़रीब आ रहा है, हड़ताल जारी रहने से सब को तकलीफ़ हो रही है.

बातचीत का दौर

सोमवार को दिन भर कर्मचारियों के नेताओं और सरकार के बीच बात चीत होती रही लेकिन कुछ अहम मुद्दों पर प्रगति नहीं हो पाई.

आख़िरकार कर्मचारियों के नेताओं और मुख्यमंत्री के बीच देर शाम तक बात चीत हुई और दोनों पक्षों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए.

कर्मचारियों ने हालाँकि तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर कोई ख़ास कामयाबी हासिल नहीं की लेकिन सरकार ने उनकी नौ दूसरी मांगे मन ली हैं.

इनमें हड़ताल की अवधि को विशेष परिस्थिति के रूप में देखना, कर्मचारियों के ख़िलाफ़ दर्ज मामले वापस लेना, एस्मा क़ानून वापस लेना और स्थाई कर्मचारियों को वापस लेना शामिल है.

हड़ताल की अवधि के लिए भी वेतन दिए जाने की मांग पर सरकार ने कहा कि वो उच्य न्यायालय की मंज़ूरी से ही यह क़दम उठा सकती है क्योंकि इससे पहले अदालत ने आदेश दिया था की काम न करने वाले कर्मचारियों को वेतन न दिया जाए.

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा है कि जब कभी ज़रुरत पड़ेगी, तेलंगाना के कर्मचारी अलग राज्य के लिए फिर एक बार हड़ताल पर जा सकते हैं.

इस हड़ताल ने राज्य की अर्थव्यवस्था को काफ़ी गहरा नुक़सान पहुंचाया है.

अनुमान लगाया जा रहा है कि इसके करण राज्य को दस हज़ार करोड़ रुपए से भी ज़्यादा का नुक़सान पहुंचा है.

संबंधित समाचार