फॉर्मूला वन पर मिलीजुली प्रतिक्रिया

फॉर्मुला वन रेस इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption फॉर्मुला वन रेस के सबसे सस्ते टिकट ढाई हज़ार रूपये के हैं. गांववालों को ये शिकायत है कि टिकट बड़े महंगे है.

भारत में पहली बार फ़ॉर्मूला वन की रेस को लेकर लोगों में मिली जुली प्रतिक्रिया है. जहां कुछ लोग पहली बार रेस को आंखों के सामने देखने के लिए खुश हैं वहीं गांव के किसान जिनकी ज़मीन पर ये रेस होगी नाराज़ हैं.

रफ़्तार के इस त्योहार को लेकर कई खेल प्रेमी काफ़ी उत्साहित हैं. अभी तक खेल प्रेमी टीवी पर ही रेस का लुत्फ़ उठा सकते थे, अब उनके पास दुनिया की सबसे तेज़ गाडियों को करीब से देखने का मौक़ा है.

लेकिन हर कोई इतना उत्साहित नहीं है. दिल्ली के पास ग्रेटर नोएडा में जिस जगह रेस होगी वहाँ के ज़्यादातर गांववाले खेती बाड़ी करते हैं. ऐसा ही एक गांव अट्टा गूजरां की ज़मीन रेस के मैदान से बिल्कुल करीब है.

तीन मील के इस रेस ट्रैक को बनाने के लिए किसानों से ज़मीन ली गई है. मुआवज़े का पैसा भी मिला है. गांव के कई किसान मुआवज़े की राशि से खुश नहीं हैं. वो कहते हैं कि ज़मीन जाने से उनका रोज़गार चला गया है.

गांव के एक किसान सुधीर फागना कहते हैं,"मुआवज़े की राशि कम है. हमारे लड़कों को भी कोई नौकरी नहीं मिली है. अगर इस रेस की बजाए कोई उद्योग लगता तो ज़्यादा फ़ायदा होता."

महंगे टिकट

फ़ॉर्मूला वन रेस के सबसे सस्ते टिकट ढाई हज़ार रूपए के हैं. गांववालों को ये शिकायत है कि टिकट बड़े महँगे है. बच्चे रेस देखना चाहते हैं लेकिन वो उन्हें दिखा नहीं सकते. गांव की एक महिला मीनाक्षी कहती है,"बच्चे स्कूल जाते वक्त रेस ट्रैक के करीब से रोज़ गुज़रते हैं और ज़िद करते हैं कि हमें भी रेस देखना है. लेकिन टिकट इतनी महँगी है कि हम दिखा नहीं सकते."

Image caption फॉर्मुला वन के आयोजक भारत में रेस का होना बड़ी उपलब्धि मानते है.

टिकट खरीदने में असमर्थ अट्टा गूजरां के बच्चे मोहल्ले की छतों पर चढ़ रेस की झलक लेने की योजना बना रहे हैं.

रेस की तैयारी पूरी हो गई है.रविवार को फ़ॉर्मूला वन से पहले सपोर्ट रेस के रूप में मानेजाने वाली जेके रेसिंग एशिया सिरीज़ की दौड़ भी होगी.

इस रेस के प्रायोजक और उद्योगपति रघुपति सिंघानिया कहते हैं कि ज़मीन का अधिग्रहण सिर्फ़ फ़ॉर्मूला वन की रेस के लिए नहीं हुआ है.

वो कहते हैं,"फ़ार्मूला वन का जो सर्किट है वो सिर्फ खेल के लिए नहीं बल्कि उस पूरी ज़मीन पर रियल एस्टेट का विकास हो रहा है. वहां एक बड़ा खेल कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है जिसके साथ में घर भी बनाए जा रहे हैं. हिन्दुस्तान के किसी भी कोने में घर बनाए जाएंगे तो किसानों की ज़मीन ली जाएगी. इसका हल हमें निकालना होगा, मुआवज़े की राशि पर ध्यान देना होगा."

वहीं फ़ॉर्मूला वन के आयोजक भारत में रेस का होना बड़ी उपलब्धि मानते है. घरेलू प्रशंसकों की नज़र दुनिया की चोटी के ड्राइवर के अलावा भारत के नारायण कार्तिकेयन पर टिकी रहेंगी. आयोजकों को उम्मीद है कि लगभग 1 लाख लोग स्टैंड्स से इस रेस देखेंगे.

संबंधित समाचार