'एक करोड़ मांगा, पाँच करोड़ मिले'

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Image caption सुरक्षा की चिंताओं को खारिज करते हुए सुशील ने कहा कि उन्हें अपनी जीती हुई राशि पर कर देने पर गर्व होगा.

बीबीसी श्रोता और कौन बनेगा करोड़पति में पाँच करोड़ जीतने वाले सुशील कुमार का कहना है कि उनकी ज़िंदगी जैसे बदल ही गई है और उन्हें बिल्कुल यकीन ही नहीं हो रहा है.

हालाँकि मुंबई में बैठे सुशील को मोबाईल फ़ोन पर महंगी रोमिंग के कारण बढ़ते बिल की भी चिंता सता रही है.

उनका कहना था, “मुझे अविश्वसनीय लग रहा है हालाँकि मुझे महसूस हो रहा है कि मैं वही लड़का हूँ जिसकी सामान्य ज़िंदगी है, जो रात में बीबीसी सुनता है और सुबह अख़बार पढ़ता है. दिनभर दफ़्तर में ड्यूटी करता है.”

सुशील के साथ बातचीत का ऑडियो सुनिए

बीबीसी से अपने जुड़ाव पर सुशील कहते हैं, “मेरे पिता, दादा सभी बीबीसी हिंदी सेवा सुनते हैं. होश भी नहीं था तबसे बीबीसी बजता था हमारे घर में."

सुशील ने कहा कि वो जब वो मुंबई आ रहे थे तो पटना जंक्शन के हनुमान मंदिर गए थे.

उन्होंने बताया, “वहाँ मैने कहा कि अगर मैं करोड़पति बना तो मैं चाँदी की गदा चढ़ाऊँगा. हनुमान जी ने दया की. अब चाँदी की गदा चढ़ाउंगा लेकिन उसमें सोने का परत चढाकर. मैने एक करोड़ मांगा था, उन्होंने पाँच करोड़ दिया.”

सुरक्षा की चिंताओं को खारिज करते हुए सुशील ने कहा कि उन्हें अपनी जीती हुई राशि पर कर देने पर गर्व होगा.

उन्होंने कहा कि उन्हें हमेशा से ही विश्वास था कि वो इस खेल से कम से कम 25 से 50 लाख की रक़म तो ज़रूर ही वापस जीतकर आएँगे.

भविष्य की योजनाओं पर सुशील ने कहा कि वो प्रशासनिक सेवा की प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी करने दिल्ली आएँगे.

सफ़र

मुंबई के अंधेरी के एक होटल में ठहरे सुशील केबीसी में अपने सफ़र के बारे में बताते हैं कि शुरूआत में जब फ़ास्टेस्ट फ़िंगर फ़र्स्ट के लिए उन्हें मनमुताबिक सफ़लता नहीं मिल पाई तो वो काफ़ी घबरा गए और उन्हें लगा कि वो हॉट सीट पर नहीं बैठ पाएंगे.

वो बताते हैं, “लेकिन जब मैं हॉट सीट पर बैठा तो सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही कि अमिताभ बच्चन के सामने बैठा था. शहर के सभी लोग जान गए मुझे. जैसे जैसे प्रश्न आते गए, मुझे लगा कि मैं उनका उत्तर दे सकता हूँ.”

सुशील कहते हैं कि जब वो एक करोड़ रुपए जीत गए तो उन्होंने सोच लिए कि अब बहुत हुआ, लेकिन फिर सोचा कि चलो आखिरी सवाल भी देख लिया जाए. लेकिन जब उन्होंने वो सवाल देखा तो सोचा कि अगर वो ध्यान से जवाब दें तो उसका जवाब दे सकते हैं.

बड़ी-बड़ी बातें

मुंबई शहर के एक महंगे होटल में ठहरने की अपने अनुभव के बारे में वो कहते हैं कि केबीसी आने के बाद बहुत बड़ी-बड़ी बातें हुईं.

“मैं पहली बार ऐसे होटल में ठहरा जिसके जैसे होटल के गेट पर खड़ा होकर मैं सोचता था कि इस होटल के एक दिन का खर्च मेरे दो या तीन महीने की तन्ख्वाह के बराबर होता है.”

पाँच करोड़ के सवाल के बारे में पूछने सुशील कुमार ने कुछ भी कहने से मना कर दिया लेकिन उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में सामान्य सवाल रहते हैं.

“जो व्यक्ति बीबीसी सुने या मैगज़ीन पढ़े वो अच्छा प्रदर्शन कर सकता है. सवालों के जवाब देना मुश्किल नहीं था. मैं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता हूँ. एक बार मैं यूपीएससी मैं साक्षात्कार भी दे चुका हूँ. प्रतिदिन मैं रेडिया के संपर्क में रहा, चाहे वो बीबीसी हो या फिर कुछ और. टीवी तो मिलता नहीं था, तो बीबीसी ही सुना करते थे. जबसे होश भी नहीं था, तभी से हमारे घर में बीबीसी सुना जाता रहा है. जब मेरा ऑडिशन हुआ था, तो मैने कहा था कि मैं बीबीसी काफ़ी सुनता हूँ.”

जब सुशील से पूछा गया कि वो उन्हें मिलने वाली राशि में से एक बड़ी रक़म तो कर देने में चली जाएगी, तो उन्होंने कहा कि कर देना उनके लिए गर्व की बात होगी.

उन्होंने कहा, “ज़िंदगी भर मैं जितना कमा नहीं पाता, उससे ज़्यादा मैं टैक्स दे रहा हूँ. ये बहुत अच्छी बात है. ये मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है. मैं गौरान्वित महसूस कर रहा हूँ.”

लेकिन बाकी बचे हुए पैसों का वो क्या करेंगे?

वो कहते हैं, ''मेरी कुछ छोटी-छोटी आवश्यक्ताएँ हैं जैसे घर बनवाना है, भाइयों का व्यापार करवाना है. उसके बाद जो कुछ पैसे बचेंगे, गरीब बच्चों के लिए कुछ ऐसा जिससे उनकी पढ़ाई-लिखाई हो सके, तो उनके लिए मैं कुछ ज़रूर करूँगा क्योंकि मैं भी उसी पृष्ठभूमि से आया हूँ.”

ये पूछे जाने पर कि इतना धन आने के बाद क्या कोई असुरक्षा की भावना भी है, तो सुशील ने कहा कि उन्हें इस ऐसी कोई चिंता नहीं हैं क्योंकि बिहार में बहुत बदलाव हुए हैं.

“मुझे गर्व है कि मैं बिहार का हूँ. मैने बिहार को बदलते हुए देखा है. मैने महसूस किया है कि बिहार पहले क्या था और अब क्या है. अब यहाँ शांति है.”

मुंबई जब मैं आया था तो मेरे पास उस ढंग के कपड़े भी नहीं थे कि मैं बैठ सकूं. तो मैने कुछ कपड़े खरीदे थे 400-500 रुपए के. वो ही मैं पहन कर गया था, वो ही मैं पहन कर आउँगा.

मेरी शुरू से ही इच्छा थी कि मैं सिविल सर्विसेज़ की तैयारी करूँ. मैं नौकरी को छोड़कर दिल्ली में सिविल सर्विसेज़ की तैयारी करूँगा.

हालाकि जाते जाते उन्होंने ये भी कहा, "मेरे पास लगातार फ़ोन कॉल आ रहे हैं, लेकिन मैं रोमिंग पर हूँ इसलिए मेरा काफ़ी पैसा भी लग रहा है."

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