टू जी पर पीएसी की बैठक स्थगित

  • 31 अक्तूबर 2011
मुरली मनोहर जोशी
Image caption कांग्रेसी सांसदों के हंगामे की वजह से मुरली मनोहर जोशी को बैठक स्थगित करनी पड़ी.

सोमवार को लोकलेखा समिति की होने वाली बैठक हंगामे के कारण रद्द करनी पड़ी. इस बैठक में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की टू जी रिपोर्ट को लेकर चर्चा होनी थी.

बैठक में 2जी रिपोर्ट के पूर्व लेखा परीक्षक आरपी सिंह से सवाल-जवाब होना था लेकिन कांग्रेस सांसदों की आपत्ति की वजह से बैठक की कार्रवाई को रोक देना पड़ा.

ये बैठक कल मंगलवार भी होनी थी लेकिन छठ त्योहार के कारण तारीख को आगे बढ़ा दिया गया.

लोकलेखा समिति 2जी स्पेक्ट्रम के आवंटन मामले की जाँच कर रही है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भाजपा और अन्य विपक्षी दल चाहते थे कि आरपी सिंह को समिति के सामने बुलाया जाए, और पूछा जाए कि महालेखा परीक्षक के 1.76 लाख के नुकसान के आंकड़े से वो संतुष्ठ क्यों नहीं हैं. रिपोर्टों की माने तो सिंह के मुताबिक टूजी स्पेक्ट्रम मामले में सरकार को करीब 6,000 करोड़ का नुकसान हुआ जो कि 1.76 लाख करोड़ के आंकड़े से बेहद कम है.

कोई नुकसान नहीं?

पीटीआई के मुताबिक भाजपा के प्रकाश जावडेकर ने मांग की है कि आरपी सिंह के अलावा दूरसंचार मंत्री कपिल सिबल को भी समिति में बुलाया जाए. सिबल कह चुके हैं कि स्पेक्ट्रम के आवंटन में सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ.

एआएडीएम सदस्य एम थंबीदुराई ने सीबीआई प्रमुख को भी समिति के सामने बुलाने की मांग की क्योंकि उन्होंने भी घाटे की दूसरी कुछ और रक़म बताई थी.

भाजपा, बीजू जनता दल और एआईएडीएम सदस्यों ने कांग्रेस सदस्य संजय निरुपम की लिखी चिट्ठी की ओर इशारा किया और कहा कि जिन सवालों का जवाब अभी तक नहीं मिला है, उन पर भी बहस किए जाने की ज़रूरत है.

उधर कांग्रेस सदस्यों का कहना था कि आरपी सिंह से नहीं कहा जा सकता कि वो नियंत्रक और महालेखा परीक्षक विनोद राय और उनकी टीम के सामने आकर अपने विचार पेश करें क्योंकि टीम के विचार सिंह से मेल नहीं खाते.

समाचार एजेंसी के मुताबिक कुछ कांग्रेस सदस्यों का कहना था कि संजय निरुपम की चिट्ठी ने उनकी परेशानी बिना वजह बढ़ा दी है. ये मामला अभी संयुक्त संसदीय समिति के पास है और लोकलेखा समिति को इस फ़ैसले पर दोबारा विचार करने से रोका जा सकता था.

लेकिन विपक्षी सदस्यों ने मांग की कि सेवानिवृत्त हो चुके आरपी सिंह को डरने की कोई ज़रूरत नहीं है और वो समिति के सामने अपना बयान दे सकते हैं.

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