उत्तराखंड विधानसभा में लोकायुक्त विधेयक पारित,मुख्यमंत्री समेत अफ़सर भी दाएरे में

  • 2 नवंबर 2011
खंडूरी
Image caption मुख्यमंत्री, मंत्री और सरकारी अफ़सर लोकायुक्ता बिल के परिधि मे होंगे.

उत्तराखंड की विधानसभा ने लोकायुक्त विधेयक को पारित कर दिया है. मंगलवार को सदन में काफ़ी देर तक चली चर्चा के बाद उत्तराखंड लोकायुक्त बिल, 2011 को सर्वसम्मति से पारित किया गया.

इस बिल के दायरे में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक समेत सरकारी अफ़सर भी होंगे. इस विधेयक के अंतर्गत उम्रकैद से लेकर और कठोर सजा़ का भी प्रावधान है.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी का कहना है कि यह बिल भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ काफ़ी उपयोगी साबित होगा.

पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल के कुर्सी छोड़ने के बाद खंडूरी ने 11 सितंबर को राज्य के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के दौरान अगले दो महीने में लोकायुक्त बिल लाने का वादा किया था.

राज्य की सभी निचली अदालतें लोकायुक्त बिल के दायरे में आएंगी जबकि उत्तराखंड हाईकोर्ट इससे बाहर रहेंगी.

इस बिल की परिधि में पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री और सेवानिवृत अफ़सर भी शामिल होंगे.

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे और उनके सहयोगी पिछले कई महीनों से भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मज़बूत लोकपाल बिल लाने के लिए संघर्ष कर रहे है.

संसद ने अन्ना हज़ारे की केंद्रीय स्तर पर लोकपाल के गठन की मांग को स्वीकृति दे दी है. हालाकि बिल को लेकर सरकार और टीम अन्ना के बीच रस्साकशी अभी भी जारी है.

एक तरफ सरकार ने कहा है कि लोकपाल बिल को संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा वही टीम अन्ना को सरकार के वादे मे खोट नज़र आती है.

वो चाहते है कि इस बार सरकार के पास बिल को संसद में पेश करने के अलावा कोई रास्ता ना बचे.

अन्ना हज़ारे चाहते है कि जन लोकपाल बिल को बिना किसी बदलाव के पारित कर दिया जाए. हालाकि सरकार इस बिल को लेकर अन्ना हज़ारे से एकमत में नही है.

सरकार और टीम अन्ना के बीच जन लोकपाल बिल के अनेक बिंदुओ पर अब भी मतभेद है.

इसमें से प्रमुख तौर पर प्रधानमंत्री को लोकपाल बिल के दायरे में लाना और लोकपाल की अलग सतर्कता टीम बनाने को लेकर मतभेद बरक़रार है.

संबंधित समाचार