‘जान की परवाह न कर मदद करो’

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Image caption भारत में आए दिन महिलाओं को छेड़-छाड़ की घटनाओं का सामना करता है.

अपनी महिला दोस्तों के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने का ख़मियाज़ा वैलेरियन सांटोस के बेटे और उसके दोस्त ने जान देकर चुकाया.

लेकिन इससे डरने की बजाय वैलेरियन चाहते हैं कि उनके छोटे बेटे भी बड़े भाई की ही तरह जान की परवाह न कर मुश्किल में पड़े लोगों की मदद करें.

20 अक्तूबर की रात को मुंबई के अंबोली इलाके में कीनन सांटोस और रूबेन फ़र्नांडिज़ ने जब अपनी महिला मित्रों के साथ कुछ लोगों की बदतमीज़ी का विरोध करने की हिम्मत दिखाई, तो उन पर हमला किया गया.

इसी मारपीट में बुरी तरह से ज़ख़्मी 25 वर्षीय कीनन की 11 दिन पहले मृत्यु हो गई थी जबकि सोमवार को रूबेन की अस्पताल में मृत्यु हुई.

बीबीसी से बात करते हुए कीनन के पिता वैलेरियन सांटोस ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की जान बिना किसी वजह जाने का दुख है. लेकिन इस बात से वो अपने बाकी दोनों बेटों के लिए डरे नहीं हैं.

वैलेरियन का कहना था, “मुझे बहुत दुख है क्योंकि बिना किसी वजह के मेरे बेटे की जान गई. वो सिर्फ़ 24 साल का था. उससे छोटे मेरे 18 साल के जुड़वां बेटे हैं. मैंने उनको कहा है कि अगर कहीं भी भ्रष्टाचार देखो या किसी महिला या किसी भी व्यक्ति को मुश्किल में देखो, तो अपनी जान की परवाह न करते हुए उनकी मदद करो.”

कीनन और रूबेन के दोस्तों का कहना है कि तमाम भीड़ के बावजूद कोई उनकी मदद के लिए सामने नही आया.

इसकी वजह पूछने पर वैलेरियन का जवाब था, “ऐसे वक़्त पर ज़्यादातर लोग डर जाते हैं. वो सोचते हैं कि ये मेरा मामला नहीं है तो क्यों इस पचड़े में पड़े. फिर पुलिस और कोर्ट का भी लफ़ड़ा होता है इसलिए कोई आगे नहीं आया होगा.”

पुलिस ने घटना में शामिल चार कथित आरोपियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में ले लिया है और गुरूवार को इनकी मुंबई की एक अदालत में पेशी हुई.

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