सत्यम घोटाले में अभियुक्त राजू को ज़मानत

  • 4 नवंबर 2011
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Image caption राजू दो साल आठ महीने जेल में काट चुके हैं

सुप्रीम कोर्ट ने सत्यम के संस्थापक रामलिंगा राजू और उनके भाई बी रामा राजू को ज़मानत दे दी है.

रामलिंगा राजू और उनके भाई पर सत्यम कंप्यूटर्स में हज़ारों करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप है.

सत्यम के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी श्रीनिवास वद्लामनि को भी ज़मानत मिल गई है.

इसके साथ ही अदालत ने कहा है कि यह तीनों अपना पासपोर्ट कोर्ट में जमा कर दें.

अदालत ने आदेश जारी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पीठ ने इस बात को भी ध्यान में रखा कि इन्होंनें दो साल और आठ महीने सलाखों के पीछे बिता दिया है जबकि आरोप साबित होने पर इस जुर्म की अधिकतम सज़ा सात साल है.

सत्यम घोटाले में दस अभियुक्त हैं. इनमें से पांच को 12 अक्तूबर को ज़मानत मिली थी जबकि दो और पहले ही ज़मानत पर छूटे थे.

पिछले महीने 12 तारीख़ को सुप्रीम कोर्ट ने सत्यम के चार पूर्व कार्यकारियों को ज़मानत दी थी जिनमें मुख्य ऑडिटर वीएस प्रभाकर गुप्ता, जी रामाकृष्णा, डी वेंकटपति राजू और श्रीसैलम शामिल थे.

इनके अलावा प्राइसवाटरहाउस कूपर्स के पूर्व ऑ़डिटर सुब्रमणि गोपालाकृष्णन को भी ज़मानत मिली थी

रामलिंगम राजू के छोटे भाई बी सूर्यनारायण राजू प्राइसवाटरहाउस कूपर्स के पूर्व ऑडिटर टी श्रीनिवास को पहले ही दूसरी अदालत से ज़मानत मिल गई थी.

मामला

सत्यम के संस्थापक रामलिंगा राजू पर कंपनी में हज़ारों करोड़ रुपए का घोटाला करने का आरोप है.

इस मामले में रामलिंगा राजू और उनके भाई रामा राजू को गिरफ़्तार किया गया था.

इसके कुछ दिन बाद प्राइस वाटरहाउसकूपर्स के दो ऑडिटर्स को भी हिरासत में ले लिया गया था.

इस घोटाले के सामने आने के बाद सरकार ने सत्यम के बोर्ड को भंग कर दिया था और नए निदेशक मंडल का गठन कर दिया गया था.

नए बोर्ड ने सत्यम को टेक महिंद्रा को बेच दिया था.

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