पुलिस अफसर का मामला राजनीतिक मुद्दा बना

  • 5 नवंबर 2011
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Image caption विपक्षी दलों ने देवेंद्र दत्त मिश्र के मामले की जाँच करवाने की मांग की है

उत्तर प्रदेश में एक पुलिस अफसर की बगावत मुख्यमंत्री मायावती के लिए एक राजनीतिक मुसीबत बन गई है.

सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले पुलिस अधिकारी डीआईजी देवेंद्र दत्त मिश्र की दिमागी हालत ठीक नहीं है.

वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने पुलिस अफ़सर द्वारा लगाए गए आरोपों की न्यायिक जांच कराने की मांग की है.

इस बीच सरकार ने फ़ायर सर्विस विभाग के एडीजी हरीश चंद्र सिंह का तबादला पुलिस ट्रेनिंग विभाग में कर दिया है.

उत्तर प्रदेश के प्रमुख गृह सचिव कुंवर फ़तेह बहादुर ने एक प्रेस कांफ़्रेंस में कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले पुलिस डीआईजी देवेन्द्र दत्त मिश्र पिछले एक महीने से मानसिक रूप से बीमार हैं या अवसाद का शिकार हैं.

प्रमुख सचिव गृह ने बताया कि इस मामले की जानकारी जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को हुई तो उन्होंने डीआईजी मिश्र के परिवारजनों से संपर्क कर यह जानने की कोशिश की उनके पारिवारिक जीवन में सब सामान्य था या नहीं.

इसके बाद मिश्र के परिवार को लोग और निकटजनों से साथ उनकी वार्तालाप कराने का भी प्रयास किया गया, जिनके साथ भी उनका व्यवहार ठीक नहीं रहा.

तनाव और अवसाद

उन्होंने बताया कि मिश्र की पुत्री के माध्यम से यह भी ज्ञात हुआ कि पिछले कुछ समय से वह मानसिक अवसाद में थे और उन्हें चिड़चिड़ापन और भूख न लगने की शिकायत थी. साथ ही उनका वजन भी घट रहा था.

फ़तेह बहादुर ने कहा कि डीआईजी मिश्र द्वारा मीडिया के समक्ष कुछ बातें कही गई थी, जो सामान्य रूप से सेवा नियमावली के विरूद्ध है.

गृह सचिव का कहना है कि पुलिस अफ़सर मिश्र का इलाज लखनऊ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है.

गृह सचिव फ़तेह बहादुर ने मेडिकल कालेज के मानसिक रोग विभाग के डाक्टर प्रोफ़ेसर दलाल का हवाला देते हुए कहा कि मिश्र की मानसिक स्थिति ठीक नही है और उन्हें 'बाई पोलर इफेक्टिव डिसोर्डर' नाम की बीमारी है.

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Image caption सरकार कह कही है कि डीआईजी मिश्र को मानसिक अवसाद है

देवेन्द्र दत्त मिश्र प्रांतीय पुलिस सेवा पी पी एस से पदोन्नति पाकर आई पी एस बने थे. इस समय वह अग्नि शमन विभाग में डीआईजी पद पर तैनात थे.

जानकार लोगों का कहना है फ़ायर सर्विस विभाग में बड़े पैमाने पर खरीद फ़रोख्त हो रही थी और वरिष्ठ अधिकारियों ने डीआईजी मिश्र पर दबाव बनाकर जबरन कुछ फाइलों पर दस्तखत करवा लिए थे. इस कारण वह पिछले कुछ हफ़्तों से तनाव में थे.

इसी तनाव की स्थिति में मिश्र ने शुक्रवार को कई फाइलों ओर कंट्रोल रूम के रजिस्टर में दर्ज कर दिया कि विभाग में और उत्तर प्रदेश सरकार में ऊपर तक ज़बर्स्दस्त भ्रष्टाचार है.

उन्होंने पत्रकारों को बुलाकर उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार और कई सीनियर पुलिस अफ़सरों पर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए.

इस तरह एक सीनियर अफसर के बाग़ी तेवर से घबराई सरकार ने शुक्रवार की रात पुलिस भेजकर डीआईजी मिश्र को जबरन दफ्तर से बाहर निकाला और मेडिकल कालेज में भर्ती करा दिया.

विपक्ष नाराज़

विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर माया सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है.

गृह सचिव ने बताया कि देवेन्द्र दत्त मिश्र द्वारा मीडिया के समक्ष लगाये गये विभिन्न आरोपों के संबंध में पूरे मामलें की जांच पुलिस महानिदेशक, भ्रष्टाचार निवारण संगठन द्वारा कराये जाने का शासन द्वारा निर्णय लिया गया है

लेकिन विपक्ष सीबीआई या उच्च न्यायालय से जांच की मांग कर रहा है.

विधान सभा में विरोधी दल के नेता शिवपाल यादव ने एक बयान में कहा कि माया सरकार ईमानदार अधिकारियों का उत्पीडन कर रही है. यादव ने आरोप लगाया कि फायर सर्विस में घोटालों की फ़ाइलें और सबूत नष्ट किये जा रहे हैं. उन्होंने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता जोशी ने एक बयान में कहा कि बाग़ी पुलिस अफसर को सुरक्षा दी जाए और उनके आरोपों की जांच उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश से करवाई जाए.

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र ने भी आरोपों की जांच हाई कोर्ट जज से कराने की मांग की है.

कलराज मिश्र ने इस बात पर आपत्ति जताई कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाने वाले डीआईजी को मानसिक रूप से विक्षिप्त बता दिया गया.

प्रेक्षकों का कहना है कि अब जब विधान सभा चुनाव करीब हैं इस तरह एक ईमानदार अफ़सर को मानसिक रूप से बीमार बताने की कोशिश माया सरकार की छवि को और ख़राब करेगी.

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