भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, सरकार ने अस्पताल भेजा

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Image caption डीआईजी मिश्रा को अस्पताल ले जाते पुलिसकर्मी

उत्तर प्रदेश शासन में उच्चतम स्तर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को मायावती सरकार ने मानसिक रूप से बीमार बताकर जबरन अस्पताल में भर्ती करवा दिया है.

फ़ायर सर्विस विभाग में डीआईजी देवेन्द्र दत्त मिश्र ने शुक्रवार की शाम मीडिया में बयान दिया था कि फ़ायर सर्विस विभाग में ख़रीद-फ़रोख़्त में जबर्दस्त घपला है, लेकिन दबाव के बावजूद उन्होंने फाइलों पर दस्तख़त करने से मना कर दिया है.

डीआईजी मिश्र ने पत्रकारों को कंट्रोल रूम का एक रजिस्टर दिखाया जिसमें उन्होंने लिखा है, “उत्तर प्रदेश शासन में सभी कुछ अवैध है. इससे बड़ा स्कैम संभव नही है.”

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ़ से जारी एक बयान में कहा गया है कि मिश्र का ये आचरण सरकारी कर्मचारी नियमावली का स्पष्ट उल्लंघन है, फ़िर भी उनके आरोपों की जांच करवाई जाएगी.

प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने कहा, “यदि उन्हें कोई बात कहनी थी तो मीडिया के बजाय उसे उचित माध्यम यानि अपने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के संज्ञान में लाना चाहिए था. उनका यह आचरण उचित नहीं है.”

मिश्र का कहना है कि उन्होंने विभाग में सामान की ख़रीद संबंधी कई फ़ाइलों पर भी ऐसी टिप्पणियाँ लिख दी हैं.

पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कुछ समय पहले वरिष्ठ आईएएस अफ़सर हरमिंदर राज सिंह की आत्महत्या को क़त्ल करार दिया और इसके लिए सीधे मुख्यमंत्री मायावती को ज़िम्मेदार बताया.

उन्होंने कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए.

छवि

विभाग में मिश्र की छवि एक ईमानदार अधिकारी की रही है. उनका कहना है कि महात्मा गांधी और अन्ना हजारे उनके आदर्श हैं.

उनका कहना है कि उन्होंने अपने परिवार में चर्चा करके, सोच समझकर ये कदम उठाया है.

देवेंद्र दत्त मिश्र ने शीघ्र ही भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ संघर्ष छेड़ने की बात कही.

इस तरह एक वरिष्ठ अधिकारी के बाग़ी तेवर की सूचना पाकर बड़ी संख्या में पत्रकार इंदिरा भवन स्थित फायर सर्विस कार्यालय पहुँच गए.

कुछ देर बाद ही स्थानीय पुलिस के अफ़सर पहुँच गए और एक-एक करके पत्रकारों को मिश्र के कमरे से बाहर निकाला.

पुलिस की कार्रवाई

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Image caption मिश्र ने अपने विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे.

फ़िर लखनऊ रेंज के डीआईजी डीके ठाकुर ने बंद कमरे में उनसे एक घंटे तक बात की.

इसके बाद रात करीब दस बजे पुलिस के लोगों ने उन्हें धक्का देते हुए जबरन दफ़्तर से बाहर निकाला और ले जाकर एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती करा दिया.

समझा जाता कि पुलिस ने ऊपर से मिले निर्देश की बाद यह कदम उठाया.

डीआईजी डीके ठाकुर ने पत्रकारों से कहा , “देवेंद्र दत्त मिश्र अनाप शनाप आरोप लगा रहे हैं, जिसका कोई सन्दर्भ नही है. लगता है श्री मिश्र का मानसिक संतुलन ठीक नही है.”

प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय पुलिस सेवा के एक वरिष्ठ अधिकारी से इस तरह की बयानबाजी की अपेक्षा नहीं की जाती और मीडिया में सीधे तौर पर दिया गया बयान सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली का स्पष्ट उल्लंघन है.

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