तृणमूल-मनमोहन मुलाक़ात पर गहमागहमी

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Image caption त्रिणमूल का कहना है कि तेल बढ़ाए जाने जैसी महत्वपूर्ण घोषणा करने से पहले उससे कोई सलाह नहीं ली गई.

तृणमूल सांसदों की मंगलवार शाम प्रधानमंत्री से मुलाक़ात है और इस बैठक पर सभी की निगाहें होंगी. तृणमूल सांसदों का कांग्रेस की सरकार से निकल जाने की बात कहना, क्या इसे पार्टी की दबाव की राजनीति माना जाए, या फिर ऐसा सचमुच हो सकता है.

तृणमूल के लोकसभा में 18 सांसद हैं और राज्यसभा में तीन. तेल के दाम बढ़ाए जाने की कई राज्यों और पार्टियों ने आलोचना की है, लेकिन तृणमूल सांसदों का समर्थन वापस लिए जाने की बात उठाए जाने से सवाल उठ रहे हैं कि क्या सहयोगी पार्टियाँ सरकार पर राजनीतिक कारणों से दबाव डाल रही हैं.

पश्चिम बंगाल में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार पार्टी सांसदों के क़दम को ड्रामा तक बता रहे हैं ताकि लोगों तक ये संदेश जाए कि पार्टी आम आदमी की कितनी बड़ी हितैषी है.

उधर तृणमूल का कहना है कि तेल बढ़ाए जाने जैसी महत्वपूर्ण घोषणा करने से पहले उससे कोई सलाह नहीं ली गई.

लेकिन यूपीए का एक और घटक दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी या एनसीपी सरकार के साथ है. एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि ईंधन के दाम बढ़ने को लेकर सरकार पर दोष मढ़ने का कोई कारण नहीं है क्योंकि दामों के बढ़ने की वजह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में उतार-चढ़ाव है.

उन्होंने ईंधन के दामों पर नियंत्रण ख़त्म करने के क़दम का भी समर्थन किया.

तृणमूल सांसदों के क़दम पर शरद पवार ने कहा कि वो सरकार के साथ हैं. ईंधन के दाम के नियंत्रण को लेकर मनमोहन सिंह की टिप्पणी पर शरद पवार ने कहा कि मनमोहन सिंह अंतरराष्ट्रीय स्तर के अर्थशास्त्री हैं और वो उनकी टिप्पणी पर टिप्पणी नहीं कर सकते.

दरअसल मनमोहन सिंह ने तेल के दाम बढा़ने के क़दम का बचाव किया था और कहा था कि ईंधन के दाम पर नियंत्रण ख़त्म करने के लिए और क़दम उठाए जाने चाहिए.

सिर्फ़ एक मांग

उधर जब लोकसभा में तृणमूल के चीफ़ व्हिप और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री सुदीप बंदोपाध्याय से पूछा गया कि क्या वो बढ़े हुए दामों को वापस करने की मांग करेंगे, तो उन्होंने कहा, “नहीं, हम किसी एक बात की मांग नहीं कर रहे हैं. हम कह रहे हैं कि ऐसे महत्वपूर्ण विषय पर उन्हें सभी पार्टियों को साथ लेकर चलना चाहिए.”

लेकिन पश्चिम बंगाल में प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रमुख प्रदीप भट्टाचार्य ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि तृणमूल सांसदों की घोषणा सरकार पर दबाव डालने के लिए उठाया गया क़दम है.

उन्होंने कहा, “ये एक नपा-तुला क़दम है ताकि केंद्र सरकार से वित्तीय पैकेज हासिल किया जाए क्योंकि पिछले तीन दशक में राज्य की आर्थिक स्थिति बहुत ख़राब हुई है. मंगलवार को वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और ममता बैनर्जी की बैठक होने वाली है और अगर ये बैठक होती है तो समस्या निपट जाएगी. मुझे विश्वास है कि तृणमूल अपना समर्थन वापस नहीं लेगी. ये एक अस्थायी स्थिति है.”

पार्टियों में दूरी

दोनो पार्टियों के बीच आ रही दूरी पर प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने तृणमूल और कांग्रेस के बीच समन्वय की बात की थी लेकिन तृणमूल इसके लिए तैयार नहीं हुई. लेकिन तृणमूल नेता सौगता रॉय प्रदीप भट्टाचार्य की इस बात से सहमत नहीं हैं.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि वो प्रधानमंत्री से कहेंगे कि सरकार को पेट्रोल के दाम बढ़ाना जैसा जन-विरोधी क़दम नहीं उठाना चाहिए और सरकारी फ़ैसलों में तृणमूल को भी साथ लेकर चलने की ज़रूरत है, हालाँकि सौगता रॉय ने सुदीप बंदोपाध्याय की बात से हटकर कहा कि वो प्रधानमंत्री से मांग करेंगे कि पेट्रोल के बढ़े दामों को वापस लिया जाए.

उन्होंने इस बात से इनकार किया कि तृणमूल दबाव की राजनीति कर रही है, लेकिन कहा कि उनके प्रदेश को वित्तीय पैकज की ज़रूरत है.

सौगता राय ने कहा कि पिछली सरकार ने जिस तरह से राज्य को खराब आर्थिक हालत में छोड़ा है, उसे देखते हुए पश्चिम बंगाल को वित्तीय पैकेज की ज़रूरत है.

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