कु़डनकुलम के विरोध में विदेशी हाथ होने का आरोप

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption कुडनकुलम परमाणु संयंत्र का स्थानीय निवासी विरोध कर रह हैं जिससे परियोजना में बाधा आ रही है

संसदीय कार्य राज्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री वी नारायण स्वामी ने आरोप लगाया है कि तमिलनाडु में कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना के विरोध को विदेशी संस्थाओं से पैसा मिल रहा है.

शनिवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, "परमाणु संयंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद भी कुडनकुलम संयंत्र का जो विरोध हो रहा है उसके पीछे विदेशी एजेंसी से मिल रहे धन को बेनक़ाब करने के लिए हमने जाँच शुरु कर दी है."

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के इस संयंत्र का स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इस संयंत्र से उनकी सुरक्षा को ख़तरा हो सकता है.

प्रधानमंत्री के आश्वासन के बावजूद ये विरोध ख़त्म नहीं हो रहा है और इसकी वजह से परियोजना में देर हो रही है.

ज़रुरत

वी नारायणस्वामी का कहना था कि देश को वर्ष 2020 तक साढ़े चार लाख मेगावॉट बिजली की ज़रुरत है और इस समय देश में बिजली का उत्पादन सिर्फ़ डेढ़ लाख मेगावॉट हो रहा है.

उनका कहना था, "इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन कार्यक्रम शुरु किया गया है जिससे कि हम अमरीका की तरह ही अपनी ज़रुरत की 20 प्रतिशत बिजली परमाणु संयंत्रों से पैदा कर सकें."

उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा निगम, जो रूस के साथ मिलकर ये संयंत्र स्थापित कर रहा है, ने सुरक्षा के अत्याधुनिक उपकरण लगाए हैं और इसमें बहुत समय और पैसा ख़र्च हुआ है.

उनका कहना था कि इसके बाद भी कुछ तत्व इस संयंत्र के ख़िलाफ़ लोगों को, ख़ासकर मछुआरों को भड़का रहे हैं.

नारायणस्वामी का कहना था कि ये लोगों का अपना विरोध नहीं है इसे कुछ विदेशी एजेंसियाँ धन मुहैया करवा रही हैं.

ये पूछे जाने पर कि वो कौन सी विदेशी एजेंसी है, उन्होंने कहा, आप जानते ही हैं.

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