गिलानी पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं: मनमोहन

  • 13 नवंबर 2011
गिलानी और मनमोहन इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption सार्क सम्मेलन में दोनों नेताओं की हुई बातचीत को सकारात्मक माना जा रहा है

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ज़ोर देते हुए कहा है कि उन्हें ऐसा लगता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांति प्रक्रिया को बहाल करने में पाकिस्तान सरकार को सेना का साथ मिला हुआ है.

लेकिन वो किसी भी सूरत में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री युसुफ़ रज़ा गिलानी पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर रहे हैं.

सार्क सम्मेलन से लौटते हुए पत्रकारों से हुई बातचीत में मनमोहन सिंह ने ये भी कहा कि दोबारा बहाल हुई शांति प्रक्रिया को लेकर वे बेहद आशावादी हैं, लेकिन अगर मुंबई हमलों की तरह कोई दूसरा 'जघन्य' हमला हुआ तब इस प्रक्रिया को 'धक्का' लग सकता है.

इससे पहले सार्क सम्मेलन के दौरान गिलानी से हुई मुलाक़ात के बाद मनमोहन सिंह ने उन्हें 'शांतिप्रिय इंसान' का दर्जा दिया था.

'सेना का समर्थन'

पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी ख़ार के इस दावे पर कि भारत के साथ शुरु किए गए शांति प्रक्रिया को सेना का समर्थन प्राप्त है, पर प्रतिक्रिया देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि, "मैंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ रज़ा गिलानी से इस बात पर चर्चा की थी कि क्या शांति प्रक्रिया को पाकिस्तानी सेना का समर्थन प्राप्त है, तब मुझे यही लगा की हाँ, ऐसा ही है."

प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ़ रज़ा गिलानी को शांतिप्रिय इंसान बताने पर सफाई दी है.

मनमोहन सिंह ने कहा कि उनकी गिलानी से जितनी भी बार मुलाकात हुई है, गिलानी ने ना सिर्फ बातचीत को शांति का एकमात्र बताया है बल्कि ये भी माना है कि आतंकवाद से किसी का भला नहीं हो रहा.

मनमोहन सिंह ने कहा कि वे ऐसा मानना चाहेंगे कि पाकिस्तान में एक लोकतांत्रिक सरकार है जिसे भारत और मज़बूत करना चाहता है.

वे मानते हैं कि गिलानी के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सरकार भी भारत के साथ काम करना चाहती है.

इस सवाल पर कि क्या वे सचमुच गिलानी पर विश्वास करते हैं, प्रधानमंत्री ने साफ किया कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की अच्छी नीयत के बावजूद वो उन पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर रहे हैं.

मनमोहन सिंह के अनुसार पाकिस्तान के भारत को सबसे पसंदीदा राष्ट्र का दर्जा दिए जाने के बाद दोनों देशों के बीच बातचीत शुरु करना बेहद ज़रूरी है. इससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते भी बेहतर होंगे.

प्रधानमंत्री के मुताबिक उन्होंने गिलानी को ये अच्छी तरह से समझा दिया है कि भारतीय जनमानस इस बात से दुखी है कि मुंबई हमले के लिए दोषी लोगों को अब तक सज़ा नहीं मिल पाई है, और इस हमले के दोषियों के खिलाफ़ कार्रवाई नहीं होने पर शांति-वार्ता में दिक्कतें आ सकती हैं.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की तरफ़ भारत का रुख़ जांच करने के बाद विश्वास करने का है. उनका कहना था, "अगर भारत को उसके ख़िलाफ़ चलाए जा रहे आंतकी घटनाओं में पाकिस्तान के शामिल होने के सबूत मिलते हैं तो ये शांतिवार्ता के लिए बहुत बुरा होगा."

मनमोहन सिंह ने कहा कि सही समय आने पर वे पाकिस्तान जाएंगे.

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