वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक मुंबई में

वर्ल्ड इकानामिक फोरम इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption वर्ल्ड इकानामिक फोरम का सम्मेलन मुंबई में पहली बार हो रहा है.

वाणिज्य और व्यापार पर चर्चा के लिए बनी संस्था वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम का सत्ताईसवां सम्मेलन शनिवार से मुंबई में आयोजित हो रहा है.

तीन दिनों के इस सम्मेलन में भारत और विश्व भर के व्यापार जगत से जुड़े लोग और राजनीतिज्ञ इस बात पर चर्चा करेंगे कि भारत परेशानी के दौर से गुज़र रहे वैश्विक अर्थव्यवस्था की बहाली में किस तरह सहायता कर सकता है?

जेनेवा से जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि सम्मेलन के 26 सालों के इतिहास में ये पहली बार है जब ये आयोजन मुंबई में आयोजित किया जा रहा है.

मुंबई से बीबीसी संवाददाता निधि दत्त का कहना है कि सम्मेलन में चर्चा का मुख्य बिंदू इस बात पर होगा कि एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था मौजूदा वैश्विक आर्थिक स्थिति में किस तरह की भूमिका निभा सकता है.

मंदी

ये सम्मेलन भारत में एक ऐसे समय पर आयोजित किया जा रहा है जबकि विकसित देशों जैसे अमरीका और यूरोप की अर्थव्यवस्थाओं में विकास की रफ़्तार धीमी पड़ रही है और उनमें बढ़ोत्तरी के कोई संकेत नहीं नज़र आ रहे.

लेकिन इन सबके बावजूद भारत ने हाल के वर्षों में विकास की गति तेज़ रही है और वहां आर्थिक सुधारों में गतिशीलता जारी है.

पिछले साल भारत के दौरे से पहले अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा था कि अमरीका के आर्थिक भविष्य में एशिया के महत्व के बारे में जो कहा जाए वो कम है.

एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 21 देशों के वित्त मंत्रियों को संबोधित करते हुए अमरीका के वित्त मंत्री टिमोथी गाइथनर ने शुक्रवार को कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के मुल्कों को विश्व अर्थव्यवस्था की बहाली की कोशिशें तेज़ करनी चाहिएं.

हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था फ़िलहाल ख़ुद दिक्क़तों के दौर से गुज़र रही है.

उनका कहना है कि बढ़ती मंहगाई, ऊंचे ब्याज दर और हाल के महीनों में कम होती आंतरिक खपत योजनाकारों के लिए परेशानियों का कारण बन सकती हैं.

संबंधित समाचार