दया याचिकाओं की पड़ताल करेगा सुप्रीम कोर्ट

Image caption सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित दया याचिकाओं के ब्यौरे की मांग की है.

सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार को निर्देश दिया है कि वो ऐसे सभी लोगों के बारे में ब्यौरा मुहैया करवाए जिन्हें अदालत मौत की सज़ा सुनाई चुकी है और उनकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है.

अदालत ने ये निर्देश बुधवार को देवेंद्र सिंह भुल्लर की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया.

जस्टिस जीएस सिंघवी और एसजे मुखोपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि वो राष्ट्रपति के समक्ष वर्षों से लंबित सभी दोषी करार दिए गए अभियुक्तों की दया याचिकाओं की गंभीरता से पड़ताल करना चाहती है.

अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता राम जेठमलानी और टीआर अंघयारूजिना से इस मामले में अदालत की मदद करने को कहा, जिसे दोनों ही वकीलों ने स्वीकार कर लिया.

दया याचिका पर देरी क्यों ?

राम जेठमलानी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को फाँसी के बचाने के लिए पैरवी कर रहे हैं.

देवेंद्र सिंह भुल्लर की पिछली सुनवाई के दौरान राम जेठमलानी ने अदालत से इस केस की सुनवाई में सक्रिय भागीदारी का अनुरोध किया था.

इससे पहले कोर्ट ने केंद्र से 10 अक्तूबर तक हलफ़नामा दायर कर भुल्लर की दया याचिका पर फै़सला लेने में हुई देर की वजह बताने को कहा था.

अदालत का सवाल था कि देवेंद्र सिंह भुल्लर की दया याचिका पर फैसला करने में 8 साल का वक़्त क्यों लगा?

महत्वपूर्ण है दिल्ली में 1993 को हुए बम धमाकों के मामले में भुल्लर को मौत की सज़ा सुनाई थी. ये बम धमाका तत्कालीन युवक कांग्रेस अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा को निशाना बनाकर किया गया था.

इसमें बिट्टा गंभीर रूप से घायल हो गए थे और नौ सुरक्षाकर्मी मारे गए थे.

भुल्‍लर को 2001 में मौत की सज़ा सुनाई गई थी. भुल्लर ने 2003 में दया याचिका दायर की थी, जिसे 2011 में राष्ट्रपति ने ख़ारिज कर दिया.

सियासत

अकाली दल ने उन्हें फाँसी न देने की गुहार लगाई है.

अकाली दल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर मांग की थी कि भुल्लर की फाँसी मानवता के आधार उम्र क़ैद में तब्दील कर दिया जाना चाहिए.

उल्लेखनीय है कि संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति मौत की सज़ा को आजीवन क़ैद में बदल सकते हैं.

इसके लिए सज़ा पाए व्यक्ति को दया याचिका राष्ट्रपति के समक्ष देनी होती है. इस अनुच्छेद में दया याचिका पर निर्णय लेने के लिए किसी समय सीमा या दिशा-निर्देश का उल्लेख नहीं है.

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